उत्तराखंड का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी कौन - धोनी या जसपाल राणा

Uttarakhand News, New Delhi - जसपाल राणा और महेंद्र सिंह धोनी, दोनों ही भारत के विश्व विजेता खिलाड़ी रहे हैं। दोनी ही की गिनती हमेशा भारत के महानतम खिलाड़ियों में की जाएगी। लेकिन हमारा प्रश्न यह है कि इन दोनों में से किस खिलाड़ी की गिनती उत्तराखंड के महानतम खिलाड़ी के रूप में होनी चाहिए?

महेंद्र सिंह धोनी निर्विवाद रूप से उत्तराखंड मूल के सर्वाधिक लोकप्रिय खिलाड़ी हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है, जिससे एक अत्यंत सफल व गौरवशाली क्रिकेटर का टेस्ट सफर का अंत हो गया है। एकदिवसीय और टी-ट्वेंटी क्रिकेट में उनका सफर फिलहाल जारी रहेगा।

धोनी की गिनती केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सर्वाधिक सफल कप्तानों में की जाएगी। भारत में तो कोई अन्य कप्तान उनके आसपास भी नजर नहीं आता। भारत के लिए धोनी ने सबसे ज्यादा 60 टेस्ट मैचों में कप्तानी की और उनमें से 27 में हमें विजयी बनाया। उनके बाद सबसे ज्यादा 21 टेस्ट मैच गांगुली ने भारत के लिए जीते। धोनी की कुछ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है कभी हार ने मानने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 4-0 से धो डालना। विकेट-कीपर कप्तान के रूप में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड भी इसी महान खिलाड़ी के नाम पर है।

उधर, जसपाल राणा का रिकार्ड भी कुछ कम नहीं है। उन्होंने शूटिंग में 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व किया और सन 1994 में इसी स्पर्धा में भाग लेते हुए मिलान में वह  विश्व विजेता बने। इसके अगले ही साल उन्होंने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी गोल्ड मैडल जीता। अपने गौरवशाली करियर में उन्होेंने एशियाई खेलों में चार गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रोंज पदक भी हासिल किए।

स्पष्ट है कि दोनों ही खिलाड़ी बेहद सफल रहे। हालांकि क्रिकेट के भारत में ज्यादा लोकप्रिय होने की वजह से आम जनता धोनी को ज्यादा जानती है, लेकिन जसपाल राणा की उपलब्धियां भी कम नहीं रहीं। आजकल जसपाल राणा देहरादून में जसपाल राणा इन्सटीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नॉलाजी में र्कोंचग देते हैं।

अब प्रश्न यह है कि दोनों महान खिलाड़ियों में से हम किसे उत्तराखंड का सबसे महान खिलाड़ी कह सकते हैं।

सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंडी खिलाड़ी का तमगा शायद जसपाल राणा को मिलेगा, क्योंकि उन्होंने सदा खुद को एक उत्तराखंडी के रूप से प्रस्तुत किया, जबकि धोनी खुद को सदा रांची का वाशिंदा बताने में गर्व महसूस करते रहे।

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