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Showing posts from January, 2015

उत्तराखंड न्यूज - उत्तराखंड के पांच (5) महत्वपूर्ण समाचार

Uttarakhand News - उत्तराखंड के लोगों के लिए बीता सप्ताह काफी हलचल भरा रहा। राज्य. के ऊंची पहाड़ियों पर हुई भारी बर्फबारी से राज्य में कड़क़ड़ाती ठंड और भी बढ़ गई, लेकिन राजनीतिक मौसम गर्माया रहा। दिल्ली में उत्तराखंड मूल के लोगों ने विधनसभा सीटों पर लड़ने का फैसला करके उत्तराखंडियों को आपसी मेल-जोल बढ़ाने का अच्छा मौका दिया हुआ है। मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन करके उत्तराखंडियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य की सीमाओं से बहुत आगे का सफर तय कर लिया है। मेरी नजर में इस सप्ताह की पांच महत्वपूर्ण खबरें निम्न हैं - 1. उत्तराखंड के प्रसिद्ध भू-गर्भ वैज्ञानिक के.एस. बल्दिया (पिथौरागढ़ निवासी) को पद्म भूषण और मुंबइया फिल्मों में गीत लिखने वाले सुप्रसिद्ध एड-गुरु प्रसून जोशी को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया। 2. राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एडीसी) का 15 सदस्यीय दल ले. जनरल वी. पी. सिंह के नेतृत्व में अगले महीने प्रथम सप्ताह में 1-6 फरवरी उत्तराखंड का दौोरा करेगा। 3.  उत्तराखंडियों ने मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन किया। शायद दुबई कौथिग के बाद कौथिग का यह सबस

उत्तराखंडियों की जीत होगी मोहन सिंह बिष्ट की जीत

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Uttarakhand News - मोहन सिंह बिष्ट (Mohan Singh Bisht) का नाम बहुत सुना था, आज करावल नगर में उनका जलवा देख भी लिया। दिल्ली की राजनीति में वह सही मायनों में उत्तराखंड के शेर हैं।  Mohan Singh Bisht with BJP leader Brajesh Saurabh आज जब उनसे मुलाकात हुई, तो वह चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। जनसभाओं को संबोधित करने की व्यवस्तता के बीच वह इलाके में हो रहे एक विवाह समारोह में भी पहुंच गए। रास्ते पर चलते-चलते आस-पास के लोगों को उनके नाम से इस तरह से बुला रहे थे, मानों करावल नगर एक विधानसभा चुनाव क्षेत्र न हो, बल्कि एक बड़ा-सा गांव हो, जहां रहने वाले सभी लोग एक-दूसरे को भली-भांति जानते-पहचानते हों। लोग-बाग उन्हें देखकर मार्ग पर ही अपनी समस्याओं की उनसे चर्चा करने लगते थे, जिससे स्पष्ट होता था कि वह बिष्ट जी के साथ कितने सहज हैं। Mohan Singh Bisht with social worker Nandan Singh Rawat जब उनसे पूछा कि इस बार उन्हें कितनी टक्कर मिल रही है विरोधी दलों से, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "विरोधी दल और उम्मीदवार जनता को कितना भी दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर लें, पर मेरी दो दशकों की सेवा

उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर प्रश्नचिह्न?

Uttarakhand News - मेरे लिखे एक लेख उत्तराखंडियों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव निरर्थक पर फेसबुक पर कल एक चर्चा-सी छिड़ गई थी। इसका टॉपिक था - विनोद बछेती जी बिन्नी के नामांकन में गए या नहीं। क्या उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली से जुड़े लोग किसी उत्तराखंडी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार या किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल हो सकते हैं? इस पर मंच के पदाधिकारियों में गंभीर मतभेद नजर आए। अनेक भाइयों ने तो उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया। अब इस विषय का विश्लेषण हम तीन बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं - 1. कोई व्यक्ति कहां जाए और कहां न जाए, यह उसका व्यक्तिगत फैसला होता है। 2. यदि वह एक समूह का सदस्य है और उस समूह विशेष के नियम-कायदे उस पर लागू होते हैं, तो यह उसका निजी नहीं, बल्कि सामूहिक फैसला हो जाता है। 3. अब यदि वही व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता है, तो उसे अपने दल के प्रति भी निष्ठावान रहना पड़ता है। 4. अंतिम स्थिति यह है कि अब वह व्यक्ति एक राजनीतिक दल से भी जुड़ा है और अपने सांस्कृतिक और जाति समूह का भी अभिन्न अंग है। यहां चौथी स्थिति सब

उत्तराखंडियों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव निरर्थक

Uttarakhand News - उत्तराखंड मूल के लोगों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव कोई अच्छी खबर लेकर नहीं आए। मतदान फरवरी के पहले हफ्ते में होने हैं, पर एक बात तो अभी से तय है कि हम लोगों को अपनी जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व दिल्ली में तो नहीं मिलने वाला है। उत्तराखंड एकता मंच ने दिल्ली में उत्तराखंडियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक अच्छा कदम उठाया था। कुछ समय के लिए ऐसा लगा भी था कि उत्तराखंडी एकजुट हो गए हैं और इसके दूरगामी प्रभाव होगें, पर आखिर में ऐसा कुछ नहीं हुआ और पहले की तरह ही उत्तराखंड मूल के लोगों की उपेक्षा जारी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल उत्तराखंड जाकर खुद को उत्तराखंडियों का सबसे बड़ा रहनुमा बताते रहे हैं, पर अब उनकी असलियत खुल कर सामने आ गई है। दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने उत्तराखंडियों को यह जता दिया है कि उनकी नज़र में हम लोगों की कोई राजनीतिक औकात नहीं है। शायद वे आज भी हमें चपरासी, घरों में काम करने वाले, छोटे-मोटे ढाबों के कुक-वेटर और फील्ड ब्वॉय ही समझते हैं। मैं यहां साफ कर देना चाहूंगा कि मेरी दृष्टि में कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं है। लेकिन टिकट का सौदा

उत्तराखंड में खड़्ड में गिरकर वाहन दुर्घटना ग्रस्त

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Uttarakhand News - एक मित्र सतपाल सिंह ने एक मैक्स जीप के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने का फोटो भेजा है। प्राप्त सूचना के अनुसार देहरादून से पौखाल मांडुल जा रही मैक्स जीप मागथा के नजदीक खड़्ड में गिरकर दुर्घटना ग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों फुट नीचे गिरकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के तो पर-खच्चे ही उड़ गए हैं, पर संतोष की बात यह है कि ड्राइवर समेत वाहन में सवार सभी लोगों का जीवन बच गया है। इस दुर्घटना का कारण कुछ भी हो सकता है, मसलन ड्राइवर की लापरवाही, वाहन का अनियंत्रित हो जाना या फिर कोई टेक्निकल फॉल्ट आदि, लेकिन यह भी सच है कि उत्तराखंड की संकरी, जर्जर और ऊबड़-खाबड़ सड़कें हर साल हजारों उत्तराखंडियों की अकाल मृत्यु का कारण बन जाती हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रवासियों को बीजेपी ने पूरी तरह से किया नजरअंदाज

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Uttarakhand News, New Delhi - दिल्ली विधानसभा के लिए बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में पूर्वांचल व उत्तराखंडी मूल के नेताओं की उपेक्षा पर एकीकृत दिल्ली नगर निगम के पूर्व चेयरमैन वरिष्ठ बीजेपी नेता जगदीश ममगाईं (Jagdish Mamgain) ने सख्त नाराजगी जताई है। Senior BJP leader Jagdish Mamgain is very popular among Uttarakhandis. उनके अनुसार दलबदलूओं व अवसरवादियों को महत्व देते हुए पूर्वांचल के 35-40 लाख व उत्तराखंड के 20-22 लाख मतदाताओं को किनारे किया गया है। लोकसभा चुनाव में इन दोनों वर्गों ने बीजेपी का जमकर समर्थन किया था, पर केवल दो पूर्वांचली व एक उत्तराखंडी को टिकट दी गई है। विपरीत परिस्थितियों में भी वर्षों से बीजेपी में काम कर रहे किसी भी मुस्लिम कार्यकर्त्ता को बीजेपी ने टिकट नहीं दी है। पिछले 35 वर्ष में यह पहली बार है कि मंडल, जिला व प्रदेश पदाधिकारियों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों से उम्मीदवार चुनने में राय तक नहीं ली गई।

गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन ने जगाई सुखद भविष्य की आस

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Uttarakhandi poet: Dinesh Dhayani. Uttarakhand News, New Delhi - उत्तराखंडी सामाजिक संस्थाओं - गढ़वाल अध्ययन केंद्र और हमारी धरोहर - के तत्वावधान में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का आयोजन 18 जनवरी को दोपहर 2 बजे इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित स्क्वेयर मॉल में किया गया, जिसमें उत्तराखंड के कवियों ने अपनी विचारोत्तेजक और मार्मिक कविताओं के पाठ से वहां मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर मौजूद कवियों की लंबी सूची में से प्रमुख नाम इस प्रकार हैं - ललित केशवन, पूरन चंद कांडपाल, रमेश घिल्डियाल, जयपाल सिंह रावत चिप्पवड्डु दा, दिनेश ध्यानी, पृथ्वी सिंह केदारखंडी, कुंज बिहारी मुंडेपी, श्रीराम लिंग्वाल, उदयराम ममगाईं राठी आदि। इन कवियों और कवि सम्मेलन के आयोजकों की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। उन्होंने दरअस्ल उत्तराखंडियों को उनके साहित्य से जोड़ने की प्रशंसनीय कोशिश की है। किसी भी समाज के विकास के लिए यह जरूरी है कि ऐसे आयोजन होते रहें, पर उत्तराखंडी साहित्य से जुड़े कार्यक्रम नहीं के बराबर ही होते है। साहित्य का विकास केवल सरकारी मदद से नहीं होता, इसमें साहित्यकारों, बुद्धिजीविय

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने की गूजरों की समस्याओं की समीक्षा

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Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों राज्य सचिवालय में वन गूजरों की समस्याओं और उनके बच्चों की शिक्षा की गहनता से समीक्षा की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग व वन विभाग के अधिकारी वन गूजरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में कृषि मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ओम प्रकाश, प्रमुख वन संरक्षक एमसी शर्मा, सचिव भास्करानंद व अन्य अधिकारी मौजूद थे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने वन गूजरों की समस्याओें के निस्तारण पर सचिवालय में बैठ कर बातचीत की हो। पूर्व सरकारों के कार्यकाल में भी वन गूजरों की समस्याओं पर मगरमच्छी आंसू बहाए गए थे। कहते हैं कि जब गूजरों ने सन 1820 के आसपास यूरोपियन आक्रांताओं को अपनी जमीन से खदेड़ने की कोशिश की थी, तो निर्मम अंग्रेज शासकों ने उनमें से 200 को मार गिराया था और सरदार कलुवा गूजर का सिर काटकर देहरादून जेल के बाहर टांग दिया था। 1947 में

गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन गाजियाबाद में 18 जनवरी को

Uttarakhand News, Ghaziabad - साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां किसी भी बोली-भाषा के प्रचार-प्रसार में प्राणवायु का काम करती हैं। उत्तराखंडी समाज के लोग रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तो अक्सर करते रहते हैं, परंतु साहित्यिक गतिविधियां प्राय: कम ही देखने को मिलती हैं। ऐसे में दिल्ली से सटे इंदिरापुरम (गाजियाबाद) में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का आयोजन प्रशंसनीय है। इसके आयोजक न केवल उत्तराखंडी साहित्य का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, बल्कि वे व्यापक उत्तराखंडी संस्कृति के विकास में भी अपना योगदान दे रहे हैं। कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों में ललित केशवन, पूरन चंद कांडपाल, रमेश घिल्डियाल, जयपाल सिंह रावत चिप्पवड्डु दा, दिनेश ध्यानी और पृथ्वी सिंह केदारखंडी प्रमुख हैं। एक कमी ज़रूर खलती है कि आयोजकों ने एक भी महिला कवियित्री का नाम आमंत्रित कवियों की सूची में नहीं लिखा है। मैं तो सुझाव दूंगा कि यदि आप किसी अन्य काम में व्यस्त नहीं हैं, तो ऐसे आयोजनों का हिस्सा अवश्य बनें। दिल्ली, नोएडा या गाजियाबाद से इंदिरापुरम पहुंचना भी आसान है। यदि आप अपने वाहन से जा रहे हैं, तो रविवार के

उत्तरायणी पर दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश घोषित हो: नंदन सिंह रावत

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Uttarakhand News, New Delhi - शायद कुछ आठ-दस साल बीते होंगे, मैं दैनिक जागरण में काम करता था और अपने एक वरिष्ठ साथी दीवान सिंह बोरा के साथ तत्कालीन उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत के An age old photo depicting importance of Uttarayani Mela of Bageshwar. आवास पर अक्सर जाया करता था। वहां रावत जी के कार्यालय में कुछ महत्वाकांक्षी और कर्मठ भावी नेता भी उपस्थित रहते थे। उनमें से एक उत्साही युवक राजनीति के हर विषय पर अपने विश्लेषण से कमरे में मौजूद सभी लोगों को चुप करा देता था। हरीश रावत जी के तो काफी नज़दीक तो वह था ही, उसकी बुलंद आवाज़ और हर छोटे-बड़े नेता को अतिनिकटता से जानने-पहचानने की योग्यता उसे भीड़ से अलग करती थी। इसी व्यक्ति का नाम है नंदन सिंह रावत। नंदन सिंह रावत दिल्ली और उत्तराखंड की राजनीति में कोई नया नाम नहीं है। उत्तराखंड की तो हर पार्टी में उन्हें काफी स्नेह और आदर प्राप्त है। मुझे व्यक्तिगत रूप से काफी हैरानी होती है कि तमाम योग्तयताओं के बावजूद वह अब तक राज्यमंत्री या किसी परिषद के चेयरमैन क्यों नहीं बन सके। Fruitless never-ending political journey on for

15-20 उत्तराखंडियों को दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट देंगे नागमणि

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From right: Bharat Rawat, Samras Samaj Party Supremo Nagmani, others. Uttarakhand News, New Delhi - भरत रावत के बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं। यह वही शख्स है जिसने आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने का लगभग आत्मघाती-सा लगने वाला फैसला किया था। वह उत्तराखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाने का दावा करते हैं। आज दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में उन्हें देखा, जहां वह समरस समाज पार्टी की प्रेस वार्ता में भाग लेने आए थे, तो आंखों के सामने एक ठेठ उत्तराखंडी चेहरा तैर गया। छोटा कद, गोरा रंग, सिर पर पहाड़ी टोपी और आंखों में कुछ कर-गुज़रने की अटूट ललक। आज के युग में जब अधिकांश लोग छोटे-बड़े आयोजनों के दौरान मंच पर या उसके आसपास मंडराने की कोशिश में लगे रहते हैं, भरत एक ठेठ उत्तराखंडी की तरह स्टेज से दूर रिपोर्टरों के बीच बैठे नज़र आए। दिल्ली में बसे उत्तराखंडियों की अगली पीढ़ी को योग्य प्रतिनिधित्व देने में वह सक्षम है, उन्हें देखकर और उनसे बात करके यह अहसास हो जाता है। तो अब बात करते हैं नवगठित समरस समाज पार्टी की, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि दावा करते हैं

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकृत लाइसेंसधारी ही चलाएं वाहन

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की अलकनंदा कमांडर टैक्सी समिति ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री हरीश रावत से मांग की कि अन्य राज्यों के जो वाहन चार धाम की यात्रा पर आते हैं, उन्हें हरिद्वार या ऋषिकेश में ही रोक दिया जाए। समिति ने यह भी मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों में केवल उन्हीं वाहन चाहकों को गाड़ी चलाने की अनुमति दी जए, जिनके लाइसेंस पर्वतीय क्षेत्र में वाहन चलाने हेतु अधिकृत हों। क्या आपको समिति की मांग जायज़ लगती है? जब उत्तराखंड के लोगों के पास यह अधिकार है कि वे देश के किसी भी कोने में जाकर रोजगार करें, तो अन्य राज्य के लोगों की उत्तराखंड में निर्बाध आवागमन को कैसे बाधित किया जा सकता है। क्या मांगें धीरे-धीरे क्षेत्रीय कट्टरपन को प्रश्रय नहीं देतीं? सतही तौर पर देखने में यह जरूर लगता है कि टैक्सी समिति अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार से ऐसे निर्णय लेने की मांग कर रही है, जिससे अन्य राज्यों के टैक्सी चालक चार धाम की यात्रा पर सवारियों को न ले सकें और यह उत्तराखंड के टैक्सी चालकों के लिए एक तरह से आर्थिक आरक्षण का काम करेगा। पर मेरी निजी राय तो यह है कि कहीं न

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने जनहित कार्यों पर दिया बल

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Uttarakhand News, New Delhi - उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने 11 जनवरी को दोपहर में पंचकुइंआ रोड, नई दिल्ली स्थित गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा आयोजित मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर उत्तराखंड की पूर्व भाजपा सरकार में राज्यमंत्री रहे सचिदानंद शर्मा भी उपस्थित थे। निशंक ने गढ़वाल हितैषिणी सभा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आशा प्रकट की कि संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार जनहित के कार्य करती रहेगी। इस अवसर पर सचिदानंद शर्मा के अलावा गढ़वाल हितैषिणी सभा के पदाधिकारिगण और सैकड़ों उत्तराखंडी उपस्थित थे। Related links: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक का साक्षात्कार

पवित्र मकरैणी/उतरैणी स्नान मेला 15 जनवरी को सूर यमुना घाट पर

Uttarakhand News, New Delhi - श्री गुरुमाणिकनाथ धाम उत्तराखंड 15 जनवरी 2015 को सुबह 4 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक सूर यमुना घाट, वजीराबाद, दिल्ली में तीसरा विशाल मकरैणी/उतरैणी स्नान मेले का आयोजन करने जा रहा है। उत्तराखंड के इस पवित्र पर्व के आयोजन में पुण्य स्नान हेतु सभी भक्तों को अमंत्रित किया गया है। उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, भाषा-बोली, रीति-रिवाज, खान-पान और रहन-सहन आदि परंपराओं से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के लिए श्री माणिकनाथ धाम उत्तराखंड प्रतिबद्ध है। मकर संक्रांति के पौराणिक पर्व पर धाम यह सुनिश्चित करता है कि उत्तराखंडी युवा अपनी संस्कृति को अपनाएं। मकरैणी/उतरैणी स्नान मेला कार्यक्रम इस प्रकार है - ॰ 14 जनवरी रात 11 बजे से उत्तराखंडी ढोल, दमऊं, मस्क-बीन, रणसींग, संग-जागरण तथा उत्तराखंडी कीर्तन ॰ 15 जनवरी सुबह 4 बजे से श्री माणिकनाथ जी की नवद, सभी उत्तराखंडी देवताओं की धुंयाल एवं स्नान प्रारंभ ॰ सुबह 6 बजे से हवन और श्री माणिकनाथ जी को रोठ-भोग, खिचड़ी प्रसाद ॰ सुबह 7 बजे से प्रत्येक कीर्तन मंडली द्वारा उत्तराखंडी कीर्तन, मांगल, संस्कार गीत, थड्या गीत और खुदेण गीतों क

योग को विकास का अस्त्र बनाएं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों बीजापुर अतिथिगृह में डॉ नवीन चंद्र भट्ट की योग पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन किया। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए रावत ने कहा कि सरल भाषा में लिखी गई यह किताब, 'योग और स्वास्थ्य,' योग के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेगी तथा समाज के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। दरअसल 'योग और स्वास्थ्य', लेखक भट्ट के गहन चिंतन, मनन व रिसर्च का परिणाम है और इसमें उन्होंने योग के बारे में विविध जानकारियां समाहित की हैं। भट्ट ने कहा कि योग एक ऐसी विद्या है, जो इंसान की सेहत के लिए तो ज़रूरी है ही, उसके सर्वांगीण विकास के लिए भी अतिमहत्वपूर्ण साबित होती है। इस अवसर पर प्रो. एच. एस. धामी, उत्तराखंड पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, विधायक राजेश शुक्ला, मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार, समन्वयक जनसंपर्क जसवीर सिंह आदि भी उपस्थित थे। आप कहेंगे कि एक पुस्तक के विमोचन में ऐसी क्या खास बात है कि हम उस पर इतना विचार कर रहे हैं - मुख्यमंत्री तो अनेक पुस्तकों का विमोचन अक्सर करते ही रहते हैं। नहीं, यह केवल एक किताब का प

हरीश रावत की पहली जनअदालत यमकेश्वर के कांडी में लगी

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Uttarakhand News, Pauri - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साल 2015 के पहले ही दिन घोषणा की थी कि राज्य में 26 जनआदालतें लगाई जाएंगी और यमकेश्वर के एक पिछड़े और लगभग उपेक्षित से गांव कांडी से उन्होंने अपनी जनअदालतों का क्रम 6 जनवरी से शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में जहां नगरीय इलाकों की जनता के लिए भी अपनी समस्याओं के निवारण के लिए डीएम और जनप्रतिनिधि तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि जैसा होता है, वहीं राज्य के एक अतिदुर्गम स्थल पर स्थित गांव कांडी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री अपने दल-बल के साथ पहुंचे और जनअदालत लगाकर ग्रामीणों को  एक-एक करके बुलाया और उनकी समस्याएं सुनीं व अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्याओं का निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए। बहुत से ग्रामीणों की शिकायत थी कि उनकी पेंशन लंबित पड़ी है, जिस पर रावत ने नाराज़गी प्रकट की और जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि वह खुद ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि पेंशन आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों का अधिकार है और यदि एक महीने के भीतर ऐसे लंबित मामलों का निस्तारण नहीं किया गया, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस दौरान रावत ने निम्न

उत्तराखंड सरकार ने किए अफसरों के विभागों में बदलाव

Uttarakhand News, Dehradun - संयुक्त सचिव कार्मिक अतर सिंह के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने डॉ उमाकांत पंवार को सचिव संस्कृति विभाग के पद से अवमुक्त कर दिया है। अमित सिंह नेगी भी खेल युवा कल्याण विभाग के सचिव पद पर कामकाज नहीं करेंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत शायद सचिवों की कार्यकुशलता को बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए जिन सचिवों के पास विभागों की लंबी सूची है, उन्हें कुछेक विभागों के पदभार से मुक्त कर दिया गया है। पंवार के पास तो अभी भी विभागों की एक लंबी सूची है। वह पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा, तीर्थाटन प्रबंधन एवं धार्मिक मेला आदि विभागों का कामकाज देखने के अलावा उत्तराखंड के पयर्टन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। सचिव मुख्यमंत्री, लोकनिर्माण विभाग, वित्त, खेल, युवा कल्याण तथा कार्यक्रम निदेशक पीएमयू अमित सिंह नेगी को भी सचिव खेल युवा कल्याण विभाग के पदभार से अवमुक्त किया गया है। उनके शेष कार्यभार यथावत रहेंगे। उधर, स्टाफ ऑफिसर मुख्य सचिव, प्रभारी सचिव नियोजन, विद्यालयी शिक्षा तथा केंद्र पोषित योजनाएं, डॉ एम.सी. जोशी को भी प्रभारी सचिव प्र

ठिठुरते बेसहारा आदमी से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने पूछे हाल-चाल

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Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कड़कड़ाती ठंड में सड़क के किनारे सोने पर मजबूर व्यक्ति हाल-चाल पूछे। राज्य की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में हुई बारिश की वजह से ठंड काफी बढ़ गई है और इससे बेघरबार लोगों की हालत बहुत खराब हो गई है। उत्तराखंड की जनता के लिए हरीश रावत के मन में कितना प्यार है यह बात उस समय और उभरकर सामने आ गई, जब शुक्रवार देर शाम घंटाघर चौराहे का दौरा करते वक्त वह सड़क के किनारे सो रहे एक बेसारा आदमी के पास पहुंच गए और उसका हालचाल पूछने लगे। ऐसे लोगों को सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए राज्य सरकार ने अलाव की लकड़ी के लिए जिलाधिकारियों को चार लाख रुपये दिए हैं। प्रेस व्ज्ञिप्ति में यह भी कहा गया है कि लापरवाही होने पर जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। दरअसल रावत सचिवालय में बैठक करने के बाद देर शाम को शहर के भ्रमण पर निकले थे और घंटाघर चौराहे का निरीक्षण कर रहे थे। इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बल्लूपुर चौक होते हुए आई.एस.बी.टी. पहुंचे और वहां हालात ठीक न पाकर उन्होंने वी.सी. एम.डी.डीे.ए. को फोन करके फटकार लगाई। रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक का साक्षात्कार

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रमेश पोखरियाल "निशंक" के साथ साक्षात्कारकर्ता विनोद जुगलान Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की पूर्व भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल "निशंक" पिछले दिनों एक कार्यक्रम में भाग लेने श्यामपुर खदरी आए थे। वहां प्रेस-वार्ता के दौरान विनोद जुगलान ने उत्तराखंडन्यूज डॉट ओआरजी के लिए उनका साक्षात्कार किया था। उसका एक दिलचस्प भाग आपके लिए प्रस्तुत है। विनोद - हरीश दुर्गापाल कांग्रेस में जाने के दो दिन बाद ही उत्तराखंड की राजनीति में बैकफुट पर आ गए हैं। इस विषय में आपका क्या कहना है? निशंक - आज तो पूरी कांग्रेस सरकार ही बैकफुट पर है। कानून व्यवस्था का कितना बुरा हाल है, यह जनता देख रही है। अभी हरिद्वार जनपद में एक बच्ची से सामूहिक बलात्कार की घटना के चार दिन बाद ही बच्ची मिलती है। रुड़की में दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। उत्तराखंड में अपराधों का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही चला जा रहा है। विनोद - सत्ताधारी कांग्रेस से जुड़े लोगों का आरोप है कि विकासकार्यों में भाजपा से सहयोग नहीं मिल रहा है। निशंक - देखिए हम सिर्फ भाजपा के ही लोग नहीं है, बल्कि जनता

उत्तराखंड के नैनीताल में बर्ड फेस्टिवल फरवरी 4-8

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Image: uttarakhandbirdfestival.in/ से साभार Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के नैनीताल जिले स्थित पावलगढ़ कंज़रवेशन रिज़र्व (Pawalgarh Conservation Reserve) में पांच दिवसीय उत्तराखंड स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल का आयोजन फरवरी 4-8, 2015 के दौरान किया जाएगा। उत्तराखंड फोरेस्ट डिपार्टमेंट की इको-टूरिज़म विंग ने फरवरी 2012 से उत्तराखंड बर्ड वॉचिंग प्रोग्राम के आयोजन की शुरुआत की थी। वेबसाइट में यह दाावा भी किया गया है कि पिछले दो सालों के दौरान उत्तराखंड के विभिन्न पक्षी विहारों में 24 बर्ड वॉचिंग शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 500 वनकर्मियों, नेचर गाइडों, टूर-ऑपरेटर्स, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने भी भाग लिया है। बताया जाता है कि ऐेसे आयोजनों का उद्देश्य उत्तराखंड को बर्ड-वॉचिंग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में विकसित और प्रस्तुत करना है।

उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर आज फिर भारी बर्फबारी

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भारी बर्फबारी से उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर बर्फ की चादर और मोटी हो गई। Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर आज सुबह से भारी हिमपात हो रहा है, जिससे पर्वतों के शिखरों पर जमी बर्फ की चादर और मोटी हो गई और मैदानी क्षेत्रों में ठिठुराहट बढ़ गई है। आज राज्य के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के ऊंचे पहाड़ों पर फिर से भारी बर्फबारी हुई। इसके साथ ही मैदानी इलाकों मे बरसात हुई, जिससे पारा गिर गया। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री, मुनश्यारी, धारचुला और ओली सब जगह हिमपात होने की वजह से पूरे राज्य में ठंड काफी बढ़ गई। उत्तरप्रदेश और दिल्ली तक में इसकी वजह से मौसम में बदलाव देखा गया।  मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों तक राज्य में ऐसा मौसम बना रह सकता है। 

उत्तराखंड के वन विकास निगम को और अधिकारों की पैरवी

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गत सोमवार, 29 दिसंबर के अपने कुमाऊं दौरे के दौरान बीजापुर अतिथि-गृह में वन विकास निगम के कार्यों की समीक्षा की तथा निगम को बेहतर कार्य संचालन के लिए अन्य राज्यों की तरह अधिकार दिए जाने पर बल दिया। रावत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जंगलों में सूखे और जमीन पर पड़े वृक्षों का निगम छपान करे और उनके बेहतर विपणन की व्यवस्था करे। मुख्यमंत्री ने जंगल में बहने वाले छोटे नदी-नालों को भी खनन के दायरे में लाने के निर्देश निगम को दिए। वन विकास निगम के काम-काज की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि निगम अपना वर्किंग प्लान बनाए। उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रमुख वन संरक्षक को यह भी निर्देश दिए कि जंगलों में सूखे और जमीन पर पड़े वृक्षों के छपान का अधिकार निगम को दिया जाए और महाप्रबंधक व कंजरवेटर की समिति का गठन  किया जाए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने वाइल्ड लाइफ बोर्ड के गठन और माडर्न माइनिंग प्लान के लिए कार्ययोजना शीघ्र बनाने का निर्देश दिया। बैठक में भाग लेने वालों में वन

उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी की ओर से नववर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएं

Uttarakhand News, New Delhi - आप सभी दोस्तों को उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी की ओर से नववर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सुख, समृद्धि, सुकून और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्रदान करें। कुछ मित्रों को आपत्ति है कि यह तो पश्चिमी सभ्यता का नववर्ष है। हिंदुओं का नववर्ष तो बाद में आएगा। मेरा उन्हें सुझाव है कि जीवन में उत्सव मनाने का कोई मौका कभी न गंवाएं। आज के आपा-धापी भरे युग में खुशी मनाने के अवसर दुर्लभ हैं और इंसान का जीवन बहुत छोटा-सा है। इसलिए जब भी खुशी मनाने का कोई भी बहाना मिले, उसे एक जश्न की तरह मनाएं और सदा स्वस्थ रहें, खुश रहें। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं एक बार फिर। उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी uttarakhandnews.org