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Thursday, January 29, 2015

उत्तराखंड न्यूज - उत्तराखंड के पांच (5) महत्वपूर्ण समाचार

Uttarakhand News - उत्तराखंड के लोगों के लिए बीता सप्ताह काफी हलचल भरा रहा। राज्य. के ऊंची पहाड़ियों पर हुई भारी बर्फबारी से राज्य में कड़क़ड़ाती ठंड और भी बढ़ गई, लेकिन राजनीतिक मौसम गर्माया रहा। दिल्ली में उत्तराखंड मूल के लोगों ने विधनसभा सीटों पर लड़ने का फैसला करके उत्तराखंडियों को आपसी मेल-जोल बढ़ाने का अच्छा मौका दिया हुआ है। मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन करके उत्तराखंडियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य की सीमाओं से बहुत आगे का सफर तय कर लिया है।

मेरी नजर में इस सप्ताह की पांच महत्वपूर्ण खबरें निम्न हैं -

1. उत्तराखंड के प्रसिद्ध भू-गर्भ वैज्ञानिक के.एस. बल्दिया (पिथौरागढ़ निवासी) को पद्म भूषण और मुंबइया फिल्मों में गीत लिखने वाले सुप्रसिद्ध एड-गुरु प्रसून जोशी को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया।

2. राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एडीसी) का 15 सदस्यीय दल ले. जनरल वी. पी. सिंह के नेतृत्व में अगले महीने प्रथम सप्ताह में 1-6 फरवरी उत्तराखंड का दौोरा करेगा।

3.  उत्तराखंडियों ने मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन किया। शायद दुबई कौथिग के बाद कौथिग का यह सबसे शानदार आयोजन है।

4. दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस व भाजपा ने केवल 1-1 उत्तराखंडी को उम्मीदवार बनाया। जबकि आम आदमी पार्टी ने किसी भी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया। कांग्रेस ने लीलाधर भट्ट को आर.के. पुरम सीट से उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने करावल नगर विधानसभा सीट से मोहन सिंह बिष्ट को टिकट दिया है। बिष्ट लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं। बिष्ट और भट्ट को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। उत्तराखंड के अधिकांश लोग पार्टी लाइन के विरुद्ध जाकर भी पहाड़ी उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं और उनके लिए चुनाव प्रचार में भी व्यस्त हैं।

5. टिकट बांटने में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के उपेक्षापूर्ण व्यवहार से उत्तराखंड मूल के दिल्ली निवासियों में भारी रोष व्याप्त हो गया। कई उत्तराखंडियों ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर डाली है। शायद उत्तराखंडियों के असंतोष का फायदा उठाने के लिए ही नवगठित समरस समाज पार्टी ने 15-20 उत्तराखंडियों को दिल्ली विधानसभा चुनाव में टिकट देने की घोषणा कर दी।

बिष्ट और भट्ट के अलावा दिल्ली से चुनाव लड़ने वाले कुछ प्रमुख उत्तराखंडियों के नाम इस प्रकार हैं -

1) धर्मपाल कुमाईं, बुरारी
2) बीर सिंह नेगी, कस्तूरबा नगर
3) मोहन प्रकाश, पड़पड़गंज
4) प्रकाश रावत, बदरपुर 

Monday, January 26, 2015

उत्तराखंडियों की जीत होगी मोहन सिंह बिष्ट की जीत

Uttarakhand News - मोहन सिंह बिष्ट (Mohan Singh Bisht) का नाम बहुत सुना था, आज करावल नगर में उनका जलवा देख भी लिया। दिल्ली की राजनीति में वह सही मायनों में उत्तराखंड के शेर हैं। 
Mohan Singh Bisht with BJP leader Brajesh Saurabh
आज जब उनसे मुलाकात हुई, तो वह चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। जनसभाओं को संबोधित करने की व्यवस्तता के बीच वह इलाके में हो रहे एक विवाह समारोह में भी पहुंच गए। रास्ते पर चलते-चलते आस-पास के लोगों को उनके नाम से इस तरह से बुला रहे थे, मानों करावल नगर एक विधानसभा चुनाव क्षेत्र न हो, बल्कि एक बड़ा-सा गांव हो, जहां रहने वाले सभी लोग एक-दूसरे को भली-भांति जानते-पहचानते हों। लोग-बाग उन्हें देखकर मार्ग पर ही अपनी समस्याओं की उनसे चर्चा करने लगते थे, जिससे स्पष्ट होता था कि वह बिष्ट जी के साथ कितने सहज हैं।
Mohan Singh Bisht with social worker Nandan Singh Rawat
जब उनसे पूछा कि इस बार उन्हें कितनी टक्कर मिल रही है विरोधी दलों से, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "विरोधी दल और उम्मीदवार जनता को कितना भी दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर लें, पर मेरी दो दशकों की सेवाएं क्षेत्र के लोगों को याद हैं। जीत हमारी ही होगी।" उनके चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था।

उत्तरायणी को दिल्ली में राजकीय अवकाश का दर्जा देने की मांग करने वाले समाज सेवक नंदन सिंह रावत ने कहा, "मोहन दा दिल्ली की राजनीति में उत्तराखंड के सबसे सफल राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने यह सब अपने दम पर हासिल किया है। इस बार भी करावल नगर से जीत उनकी ही होगी।"

आज दिल्ली में एेसी भी अफवाह फैली हुई थी कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र कांग्रेस की तरफ से इसी क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने पहुंचे हुए थे, हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी। पर चार बार इलाके में विजयश्री हासिल करने वाले बिष्ट जी की लोकप्रियता को देखते हुए, तो एेसा लगता है कि उनके खिलाफ चाहे कोई भी प्रचार करने आ जाए, परिणाम मोहन सिंह बिष्ट की जीत ही होगा।

Sunday, January 25, 2015

उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर प्रश्नचिह्न?

Uttarakhand News - मेरे लिखे एक लेख उत्तराखंडियों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव निरर्थक पर फेसबुक पर कल एक चर्चा-सी छिड़ गई थी। इसका टॉपिक था - विनोद बछेती जी बिन्नी के नामांकन में गए या नहीं। क्या उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली से जुड़े लोग किसी उत्तराखंडी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार या किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल हो सकते हैं? इस पर मंच के पदाधिकारियों में गंभीर मतभेद नजर आए। अनेक भाइयों ने तो उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया।

अब इस विषय का विश्लेषण हम तीन बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं -

1. कोई व्यक्ति कहां जाए और कहां न जाए, यह उसका व्यक्तिगत फैसला होता है।

2. यदि वह एक समूह का सदस्य है और उस समूह विशेष के नियम-कायदे उस पर लागू होते हैं, तो यह उसका निजी नहीं, बल्कि सामूहिक फैसला हो जाता है।

3. अब यदि वही व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता है, तो उसे अपने दल के प्रति भी निष्ठावान रहना पड़ता है।

4. अंतिम स्थिति यह है कि अब वह व्यक्ति एक राजनीतिक दल से भी जुड़ा है और अपने सांस्कृतिक और जाति समूह का भी अभिन्न अंग है।

यहां चौथी स्थिति सबसे विकट है। इस स्थिति में फंसे व्यक्ति की टांग-खिंचाई सबसे ज्यादा होती है। युवा भाजपा नेता बछेती जी और एकीकृत नगर निगम के जमाने में भाजपा की तरफ से दिल्ली की निर्माण समिति के चेयरमैन पद को सुशोभित करने वाले ममगाईं जी भी इसी श्रेणी में आते हैं। वे दोनों ही उत्तराखंड एकता मंच के महत्वपूर्ण सदस्य होने के साथ-साथ दिल्ली में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता भी हैं।

सचाई जानने के लिए मैंने डॉ विनोद बछेती, जगदीश ममगाईं, संजय नौडियाल, नंदन सिंह रावत और नई दिल्ली विधानसभा सीट पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ताल ठोककर बाद में चुनाव न लड़ने वाले भरत रावत से बात की।

नंदन सिंह रावत ने कहा, "हमें उत्तराखंडी उम्मीदवारों का साथ देना चाहिए। करावल नगर से खड़े उत्तराखंडी उम्मीदवार का विरोध खुद उत्तराखंड के लोग ही कर रहे हैं, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।"

भरत रावत ने कहा, "मैं समरस समाज पार्टी में ज्यादा से ज्यादा उत्तराखंडियों को टिकट दिलवाउंगा, लेकिन ऐसी किसी सीट पर अपनी पार्टी के लिए भी चुनाव प्रचार नहीं करूंगा, जहां पर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ कोई उत्तराखंडी खड़ा है।"

संजय नौडियाल ने कहा, "हम तो फोन करके और व्यक्तिगत रूप से जाकर अपने लोगों से निवेदन कर रहे हैं कि उत्तराखंडी उम्मीदवार चाहे किसी भी दल से हो, उसे ही जिताएं।"

बछेती जी ने कहा, "वह भाजपा के साथ पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से जुड़े हुए हैं। उत्तराखंड एकता मंच से जुड़ने का अर्थ यह नहीं था कि मैंने भाजपा छोड़ दी। यदि किरन बेदी के नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया में पार्टी मुझे बुलाती है और बिन्नी भी वहां मौजदू रहते हैं, तो मेरा वहां जाना गलत कैसे हो गया।"

जगदीश ममगाईं जी ने कहा, "यदि बछेती एक ऐसे कैंडिडेट (बिन्नी) के साथ मौजूद थे, जो कि एक उत्तराखंडी के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है, तो यह एक गलत उदाहरण है। बछेती जी से मेरी बात हुई थी 4-5 दिन पहले और मैंने कहा था कि उतराखंड एकता मंच की एक बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करते हैं। बैठक तो बुलाई नहीं गई और वह भाजपाई उम्मीदवारों के नामांकन में चले गए, यह उत्तराखंड एकता मंच के उद्द्ेश्यों के खिलाफ है। हम सबको एक ऐसी रणनीति बनानी चाहिए, जो उत्तराखंडियों के हितों के अनुसार हो और हम सबको उसी के हिसाब से चलना चाहिए।"

यहां स्पष्ट है कि मंच के सदस्यों में समन्वय का नितांत अभाव है। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बाद ऐसी कोई रणनीति ही नहीं बनाई कि यदि राजनीतिक दल उत्तराखंडियों की उपेक्षा करें, तो मंच से जुड़े लोग क्या करेंगे? ऐसे में मंच के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है। उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली के बैनर तले उत्तराखंड के 150 से अधिक सामाजिक संस्थाओं को एक करना एक ऐतिहासिक कदम था। इस पहल को काल के गाल में समाने से रोकने के लिए प्रबुद्ध और प्रभावशाली उत्तराखंडियों को आगे आना चाहिए, अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब मंच इतिहास की बात रह जाएगा।

Saturday, January 24, 2015

उत्तराखंडियों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव निरर्थक

Uttarakhand News - उत्तराखंड मूल के लोगों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव कोई अच्छी खबर लेकर नहीं आए। मतदान फरवरी के पहले हफ्ते में होने हैं, पर एक बात तो अभी से तय है कि हम लोगों को अपनी जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व दिल्ली में तो नहीं मिलने वाला है।

उत्तराखंड एकता मंच ने दिल्ली में उत्तराखंडियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक अच्छा कदम उठाया था। कुछ समय के लिए ऐसा लगा भी था कि उत्तराखंडी एकजुट हो गए हैं और इसके दूरगामी प्रभाव होगें, पर आखिर में ऐसा कुछ नहीं हुआ और पहले की तरह ही उत्तराखंड मूल के लोगों की उपेक्षा जारी है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल उत्तराखंड जाकर खुद को उत्तराखंडियों का सबसे बड़ा रहनुमा बताते रहे हैं, पर अब उनकी असलियत खुल कर सामने आ गई है। दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने उत्तराखंडियों को यह जता दिया है कि उनकी नज़र में हम लोगों की कोई राजनीतिक औकात नहीं है। शायद वे आज भी हमें चपरासी, घरों में काम करने वाले, छोटे-मोटे ढाबों के कुक-वेटर और फील्ड ब्वॉय ही समझते हैं। मैं यहां साफ कर देना चाहूंगा कि मेरी दृष्टि में कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं है। लेकिन टिकट का सौदा करने वाले दलालों की नजर नोटों से भरी थैलियों और टिकटार्थियों की बड़ी जेबों पर लगी रहती है। ऐसे दलाल टिकट बांटते समय यह ज़रूर सोचते होंगे कि ये बेचारे उत्तराखंडी कहां से लाएंगे करोड़ों रुपये टिकट खरीदने के लिए।

भाजपा ने तो प्राथमिकता से टिकट उन नेताओं को दिए, जो कांग्रेस या आम आदमी पार्टी छोड़कर उनके कुनबे में शामिल हो गए। क्या यह उन लाखों भाजपाइयों का अपमान नहीं है, जो पार्टी के कार्यक्रमों में दरी बिछाने से लेकर भीड़ जुटाने का काम तब से कर रहे थे, जब भाजपा के पास देश भर में केवल दो सांसद थे? यही वजह है कि इस बार विधानसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष फूट पड़ा था। वरिष्ठ भाजपा नेता और दिल्ली नगर निगम के पूर्व चेयरमैन जगदीश ममगाईं ने इस विषय पर कहा, "दलबदलुओं और अवसरवादियों को महत्व देते हुए पूर्वांचल के 35-40 लाख मतदाताओं और उत्तराखंड के 20-22 लाख मतदाताओं को किनारे किया गया है। लोकसभा चुनाव में इन दोनों वर्गों ने बीजेपी का जमकर समर्थन किया था, पर केवल दो पूर्वांचली और एक उत्तराखंडी को टिकट दिया गया है।"

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने एक और कांग्रेस ने भी केवल एक ही सीट पर उत्तराखंड मूल के व्यक्ति को चुनावी रणक्षेत्र में भेजने का फैसला किया है। मोहन सिंह बिष्ट और लीलाधर भट्ट यदि उत्तराखंड मूल के न भी होते, तो भी उन्हें विधानसभा का उम्मीदवार बनाया जाता लगभग तय था। लेकिन बाकी उत्तराखंडियों का क्या, जो दिल्ली में टिकट की आस लगाए बैठे थे?

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15-20 उत्तराखंडियों को दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट देंगे नागमणि

नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में एक उत्तराखंडी की सिंह-गर्जना

Thursday, January 22, 2015

उत्तराखंड में खड़्ड में गिरकर वाहन दुर्घटना ग्रस्त

Uttarakhand News - एक मित्र सतपाल सिंह ने एक मैक्स जीप के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने का फोटो भेजा है। प्राप्त सूचना के अनुसार देहरादून से पौखाल मांडुल जा रही मैक्स जीप मागथा के नजदीक खड़्ड में गिरकर दुर्घटना ग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है।


तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों फुट नीचे गिरकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के तो पर-खच्चे ही उड़ गए हैं, पर संतोष की बात यह है कि ड्राइवर समेत वाहन में सवार सभी लोगों का जीवन बच गया है।

इस दुर्घटना का कारण कुछ भी हो सकता है, मसलन ड्राइवर की लापरवाही, वाहन का अनियंत्रित हो जाना या फिर कोई टेक्निकल फॉल्ट आदि, लेकिन यह भी सच है कि उत्तराखंड की संकरी, जर्जर और ऊबड़-खाबड़ सड़कें हर साल हजारों उत्तराखंडियों की अकाल मृत्यु का कारण बन जाती हैं।

Wednesday, January 21, 2015

दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रवासियों को बीजेपी ने पूरी तरह से किया नजरअंदाज

Uttarakhand News, New Delhi - दिल्ली विधानसभा के लिए बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में पूर्वांचल व उत्तराखंडी मूल के नेताओं की उपेक्षा पर एकीकृत दिल्ली नगर निगम के पूर्व चेयरमैन वरिष्ठ बीजेपी नेता जगदीश ममगाईं (Jagdish Mamgain) ने सख्त नाराजगी जताई है।
Senior BJP leader Jagdish Mamgain is very popular among Uttarakhandis.
उनके अनुसार दलबदलूओं व अवसरवादियों को महत्व देते हुए पूर्वांचल के 35-40 लाख व उत्तराखंड के 20-22 लाख मतदाताओं को किनारे किया गया है। लोकसभा चुनाव में इन दोनों वर्गों ने बीजेपी का जमकर समर्थन किया था, पर केवल दो पूर्वांचली व एक उत्तराखंडी को टिकट दी गई है।

विपरीत परिस्थितियों में भी वर्षों से बीजेपी में काम कर रहे किसी भी मुस्लिम कार्यकर्त्ता को बीजेपी ने टिकट नहीं दी है। पिछले 35 वर्ष में यह पहली बार है कि मंडल, जिला व प्रदेश पदाधिकारियों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों से उम्मीदवार चुनने में राय तक नहीं ली गई।

Monday, January 19, 2015

गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन ने जगाई सुखद भविष्य की आस

Uttarakhandi poet: Dinesh Dhayani.
Uttarakhand News, New Delhi - उत्तराखंडी सामाजिक संस्थाओं - गढ़वाल अध्ययन केंद्र और हमारी धरोहर - के तत्वावधान में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का आयोजन 18 जनवरी को दोपहर 2 बजे इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित स्क्वेयर मॉल में किया गया, जिसमें उत्तराखंड के कवियों ने अपनी विचारोत्तेजक और मार्मिक कविताओं के पाठ से वहां मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर मौजूद कवियों की लंबी सूची में से प्रमुख नाम इस प्रकार हैं - ललित केशवन, पूरन चंद कांडपाल, रमेश घिल्डियाल, जयपाल सिंह रावत चिप्पवड्डु दा, दिनेश ध्यानी, पृथ्वी सिंह केदारखंडी, कुंज बिहारी मुंडेपी, श्रीराम लिंग्वाल, उदयराम ममगाईं राठी आदि। इन कवियों और कवि सम्मेलन के आयोजकों की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। उन्होंने दरअस्ल उत्तराखंडियों को उनके साहित्य से जोड़ने की प्रशंसनीय कोशिश की है। किसी भी समाज के विकास के लिए यह जरूरी है कि ऐसे आयोजन होते रहें, पर उत्तराखंडी साहित्य से जुड़े कार्यक्रम नहीं के बराबर ही होते है। साहित्य का विकास केवल सरकारी मदद से नहीं होता, इसमें साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जैसा कि मैंने परसों भी लिखा था कि हम उत्तराखंडी लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने में पीछे नहीं रहते। जहां भी उत्तराखंड समाज के लोग रहते हैं, वे मिल-जुलकर एक संस्था बना लेते हैं, फिर रामलीला और उत्तराखंडी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करके अपनी संस्कृति को जीवित रखने की कोशिश करते हैं। दिल्ली, फरीदाबाद, लखनऊ, चंडीगढ़ समेत उत्तर भारत के कई शहरों में मौजूद गढ़वाल भवन और कुर्माचल भवन हम उत्तराखंडियों के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के मजबूत स्तंभ हैं। हमारे पूर्वजों ने इन भवनों की स्थापना बड़े ही गर्व और आशाओं के साथ की थी। ये दुर्भाग्य की बात है कि अब ऐसे अधिकांश भवन उत्तराखंडी सभ्यता और संस्कृति के मंदिर से अधिक स्वार्थ पर आधारित राजनीति के अखाड़ों में बदल गए हैं।

ऐसा नहीं है कि गढ़वाल भवन और कुर्माचल भवन के चुनावों में भाग लेने वाले सिर्फ स्वार्थी राजनीतिक लोग ही होते हैं, उनमें कई निस्वार्थ समाज सेवक भी शामिल हैं, जिनका एकमात्र उद्द्ेश्य उत्तराखंड की सेवा करना होता है। ऐसे लोगों से मेरा निवेदन है कि अपने गढ़वाल भवनों और कुर्माचल भवनों के विशाल संसाधनों का प्रयोग उत्तराखंड के साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए भी करें। साहित्य समाज का दर्पण होता है, लेकिन आज उत्तराखंड के पास कोई दर्पण नहीं है।

दुख की बात है कि आज उत्तराखंड के साहित्य में कुछ विशेष नया नहीं हो रहा है। दूर जाने की जरूरत नहीं है आप अपने बच्चों से पूछ लो कि उत्तराखंड के साहित्यकारों के नाम बताएं, तो वे सिर खुजाने लगेंगे।

ऐसे निराशा भरे माहौल में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का आयोजन करने के लिए गढ़वाल अध्ययन केंद्र, हमारी धरोहर और उनसे जुड़े बुद्धिजीवी प्रशंसा के पात्र हैं। उन्हें इस आयोजन का दायरा बढ़ाकर इसे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर फैलाना चाहिए। इस कवि सम्मेलन के आयोजन ने सुखद-सी लगने वाली एक आस उत्तराखंडी जनमानस में जगाई है कि उत्तराखंड का साहित्य अब सुरक्षित हाथों में है।

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गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन गाजियाबाद में 18 जनवरी को

Sunday, January 18, 2015

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने की गूजरों की समस्याओं की समीक्षा


Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों राज्य सचिवालय में वन गूजरों की समस्याओं और उनके बच्चों की शिक्षा की गहनता से समीक्षा की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग व वन विभाग के अधिकारी वन गूजरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में कृषि मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ओम प्रकाश, प्रमुख वन संरक्षक एमसी शर्मा, सचिव भास्करानंद व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने वन गूजरों की समस्याओें के निस्तारण पर सचिवालय में बैठ कर बातचीत की हो। पूर्व सरकारों के कार्यकाल में भी वन गूजरों की समस्याओं पर मगरमच्छी आंसू बहाए गए थे। कहते हैं कि जब गूजरों ने सन 1820 के आसपास यूरोपियन आक्रांताओं को अपनी जमीन से खदेड़ने की कोशिश की थी, तो निर्मम अंग्रेज शासकों ने उनमें से 200 को मार गिराया था और सरदार कलुवा गूजर का सिर काटकर देहरादून जेल के बाहर टांग दिया था। 1947 में अंग्रेज चले गए, पर वन गूजरों की हालत आज भी लगभग जस-की-तस है। वे आज भी आदिम अवस्था में रहने को अभिशप्त हैं। घास-फूस की झोपड़ियों में रहने वाले गूजर आजीविका के लिए आज भी पशुपालन पर निर्भर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के साधन और लोकतांत्रिक अधिकार क्या होते हैं, अधिकांश गूजर इन बातों से अनभिज्ञ हैं।

ऐसे में हरीश रावत यदि वन गूजरों की समस्याओं का समाधान करने को तत्पर दिखते हैं, तो यह उत्तराखंड के गूजर समुदाय के लिए एक अच्छा संकेत है।

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Saturday, January 17, 2015

गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन गाजियाबाद में 18 जनवरी को

Uttarakhand News, Ghaziabad - साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां किसी भी बोली-भाषा के प्रचार-प्रसार में प्राणवायु का काम करती हैं। उत्तराखंडी समाज के लोग रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तो अक्सर करते रहते हैं, परंतु साहित्यिक गतिविधियां प्राय: कम ही देखने को मिलती हैं। ऐसे में दिल्ली से सटे इंदिरापुरम (गाजियाबाद) में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का आयोजन प्रशंसनीय है। इसके आयोजक न केवल उत्तराखंडी साहित्य का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, बल्कि वे व्यापक उत्तराखंडी संस्कृति के विकास में भी अपना योगदान दे रहे हैं।

कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों में ललित केशवन, पूरन चंद कांडपाल, रमेश घिल्डियाल, जयपाल सिंह रावत चिप्पवड्डु दा, दिनेश ध्यानी और पृथ्वी सिंह केदारखंडी प्रमुख हैं। एक कमी ज़रूर खलती है कि आयोजकों ने एक भी महिला कवियित्री का नाम आमंत्रित कवियों की सूची में नहीं लिखा है।

मैं तो सुझाव दूंगा कि यदि आप किसी अन्य काम में व्यस्त नहीं हैं, तो ऐसे आयोजनों का हिस्सा अवश्य बनें। दिल्ली, नोएडा या गाजियाबाद से इंदिरापुरम पहुंचना भी आसान है। यदि आप अपने वाहन से जा रहे हैं, तो रविवार के दिन आपको ट्रैफिक की झंझट नहीं होगी। यदि आप अपने वाहन से नहीं जाना चाहते, तो मेट्रो से कौशांबी या वैशाली मेट्रो स्टेशन तक जाकर आप वहां से शेयरिंग वाले आटो ले सकते हैं। आटो वाला आपसे केवल 10 रुपये चार्ज करेगा।

कवि सम्मेलन
समय -2 बजे
आयोजन स्थल -
इंदिरापुरम, शक्ति खंड 3, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

अधिक जानकारी के लिए कार्यक्रम के संयोजक से संपर्क करें -
रमेश घिल्डियाल,
वरिष्ठ कवि व साहित्यकार,
मोबाइल नंबर 8447494450

Thursday, January 15, 2015

उत्तरायणी पर दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश घोषित हो: नंदन सिंह रावत

Uttarakhand News, New Delhi - शायद कुछ आठ-दस साल बीते होंगे, मैं दैनिक जागरण में काम करता था और अपने एक वरिष्ठ साथी दीवान सिंह बोरा के साथ तत्कालीन उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत के
An age old photo depicting importance of Uttarayani Mela of Bageshwar.
आवास पर अक्सर जाया करता था। वहां रावत जी के कार्यालय में कुछ महत्वाकांक्षी और कर्मठ भावी नेता भी उपस्थित रहते थे। उनमें से एक उत्साही युवक राजनीति के हर विषय पर अपने विश्लेषण से कमरे में मौजूद सभी लोगों को चुप करा देता था। हरीश रावत जी के तो काफी नज़दीक तो वह था ही, उसकी बुलंद आवाज़ और हर छोटे-बड़े नेता को अतिनिकटता से जानने-पहचानने की योग्यता उसे भीड़ से अलग करती थी। इसी व्यक्ति का नाम है नंदन सिंह रावत।

नंदन सिंह रावत दिल्ली और उत्तराखंड की राजनीति में कोई नया नाम नहीं है। उत्तराखंड की तो हर पार्टी में उन्हें काफी स्नेह और आदर प्राप्त है। मुझे व्यक्तिगत रूप से काफी हैरानी होती है कि तमाम योग्तयताओं के बावजूद वह अब तक राज्यमंत्री या किसी परिषद के चेयरमैन क्यों नहीं बन सके।

Fruitless never-ending political journey on for Nandan Singh Rawat
नंदन सिंह रावत उत्तराखंड की अस्मिता और त्योहारों की पहचान को लेकर काफी भावुक हैं। उन्होंने मांग की है कि उत्तरायणी को दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। इसके पक्ष में उनका कहना है कि उत्तरायणी दिल्ली के 30-35 लाख लोगों का पवित्र त्योहार है। उत्तराखंड के लोगों की आस्था इस त्योहार से जुड़ी हुई है और भारत के प्राचीन ग्रंथों में भी इस त्योहार को अतिमहत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू ग्रंथों के अनुसार सूर्य देवता साल के छह महीने दक्षिणायन और छह महीने उत्तरायण में स्थित रहते हैं। मकर संक्रांति के पवित्र दिन सूर्य देवता उत्तरायण में प्रवेश करते हैं।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सरयू गोमती व सुप्त भागीरथी के पावन संगम पर सदियों से भव्य उत्तरायणी मेले का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंडियों की ऐसी मान्यता रही है कि मकर संक्रांति के दिन संगम मेें स्नान करने से सभी पाप कट जाते हैं और मनुष्य की आत्मा निर्मल हो जाती है।

इस अवसर पर उत्तराखंड के लोग हजारों की संख्या में दूर-दूर से संगम पर आकर मुंडन, जनेऊ संस्कार, पूजा-अर्चना व स्नान करते हैं और स्कूलों के विद्यार्थी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

इसके अलावा बागेश्वर के उत्तरायणी मेले का आर्थिक पक्ष भी रहा है। यह उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का प्राचीनतम मेला माना जाता है, जहां वस्तुओं की खरीद-फरोख्त के लिए उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के अलावा रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबाबाद, दिल्ली व उत्तरप्रदेश के अन्य जिलों से भी व्यापारी यहां आते रहे हैं।

जिस त्योहार से दिल्ली के करीब 35 लाख उत्तराखंडियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, उसे सार्वजनिक अवकाश घोषित करने में दिल्ली सरकार को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। नंदन सिंह रावत ने दावा किया है कि वह इस पवित्र दिवस के सम्मान को दिल्ली में स्थापित करने के लिए अपनी तरफ से कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। उत्तराखंड की जनता और हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

15-20 उत्तराखंडियों को दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट देंगे नागमणि

From right: Bharat Rawat, Samras Samaj Party Supremo Nagmani, others.
Uttarakhand News, New Delhi - भरत रावत के बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं। यह वही शख्स है जिसने आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने का लगभग आत्मघाती-सा लगने वाला फैसला किया था। वह उत्तराखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाने का दावा करते हैं।

आज दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में उन्हें देखा, जहां वह समरस समाज पार्टी की प्रेस वार्ता में भाग लेने आए थे, तो आंखों के सामने एक ठेठ उत्तराखंडी चेहरा तैर गया। छोटा कद, गोरा रंग, सिर पर पहाड़ी टोपी और आंखों में कुछ कर-गुज़रने की अटूट ललक। आज के युग में जब अधिकांश लोग छोटे-बड़े आयोजनों के दौरान मंच पर या उसके आसपास मंडराने की कोशिश में लगे रहते हैं, भरत एक ठेठ उत्तराखंडी की तरह स्टेज से दूर रिपोर्टरों के बीच बैठे नज़र आए। दिल्ली में बसे उत्तराखंडियों की अगली पीढ़ी को योग्य प्रतिनिधित्व देने में वह सक्षम है, उन्हें देखकर और उनसे बात करके यह अहसास हो जाता है।

तो अब बात करते हैं नवगठित समरस समाज पार्टी की, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि दावा करते हैं कि उनकी पार्टी दिल्ली में रह रहे पूर्वांचल और उत्तराखंड के प्रवासियों की एकमात्र राजनीतिक पार्टी है। नागमणि के अनुसार उनके दल का उद्देश्य दिल्ली में पूर्वांचल-उत्तराखंड प्रवासियों की सरकार का गठन करना है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि दिल्ली के 80 प्रतिशत लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली समरस समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में विजय की पताका ज़रूर फहराएगी। उनकी प्रेस-विज्ञप्ति में अरविंद केजरीवाल की तुलना नटवरलाल और डॉ गोबूल्स से की गई है। डॉ गोबूल्स का प्रचार सिद्धांत था कि यदि झठी बातों को बार-बार दुहराया जाए, तो लोग उसे सत्य समझने लग जाते हैं।

उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "आम आदमी पार्टी अब आम लोगों की पार्टी नहीं रही, बल्कि पूंजीपतियों की पार्टी बन गई है। दिल्ली में एक होर्डिंग के लिए प्रत्येक महीने 3 लाख रुपये का भुगतान सरकार को देना होता है। इस तरह के 10,000 होर्डिंग दिल्ली में लगाए गए हैं। यानी 3 हजार करोड़ रुपये प्रत्येक माह खर्च हो रहा है। इसका मतलब है कि केजरीवाल करोड़ों रुपये प्रचार पर खर्च कर रहे हैं। मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि सी.बी.आई. से जांच करवाई जाए।"

नागमणि से पत्रकारों ने पूछा कि केजरीवाल के होर्डिंग पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का आंकड़ा उन्होंने किस सोर्स से लिया है, तो वह कोई तथ्यात्मक उत्तर नहीं दे सके।

नागमणि ने यह भी बताया कि उत्तराखंड के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे उनके कार्यालय में मिला था। दिल्ली में उत्तराखंडियों की भारी जनसंख्या होने के बावजूद कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंडियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में टिकट न देकर उनकी घोर उपेक्षा की है। नागमणि ने उत्तराखंड के लोगों को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में 70 में से 15-20 सीटों पर चुनाव लड़ाने की बात भी कही।

अब यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी है कि भरत समरस समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ेगें या बिना किसी बैनर के, पर एक बात तो तय है कि उत्तराखंडियों का असीम स्नेह भरत को मिलता रहेगा - दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान भी और उसके बाद भी।

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Wednesday, January 14, 2015

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकृत लाइसेंसधारी ही चलाएं वाहन

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की अलकनंदा कमांडर टैक्सी समिति ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री हरीश रावत से मांग की कि अन्य राज्यों के जो वाहन चार धाम की यात्रा पर आते हैं, उन्हें हरिद्वार या ऋषिकेश में ही रोक दिया जाए। समिति ने यह भी मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों में केवल उन्हीं वाहन चाहकों को गाड़ी चलाने की अनुमति दी जए, जिनके लाइसेंस पर्वतीय क्षेत्र में वाहन चलाने हेतु अधिकृत हों।

क्या आपको समिति की मांग जायज़ लगती है? जब उत्तराखंड के लोगों के पास यह अधिकार है कि वे देश के किसी भी कोने में जाकर रोजगार करें, तो अन्य राज्य के लोगों की उत्तराखंड में निर्बाध आवागमन को कैसे बाधित किया जा सकता है। क्या मांगें धीरे-धीरे क्षेत्रीय कट्टरपन को प्रश्रय नहीं देतीं? सतही तौर पर देखने में यह जरूर लगता है कि टैक्सी समिति अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार से ऐसे निर्णय लेने की मांग कर रही है, जिससे अन्य राज्यों के टैक्सी चालक चार धाम की यात्रा पर सवारियों को न ले सकें और यह उत्तराखंड के टैक्सी चालकों के लिए एक तरह से आर्थिक आरक्षण का काम करेगा।

पर मेरी निजी राय तो यह है कि कहीं न कहीं टैक्सी धारकों की मांग उत्तराखंड और अन्य राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के हित में ही है। अक्सर देखा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन चलाने की अनुभव की कमी के चलते बाहरी टैक्सी चालक दुर्घटनाओं का सबब बन जाते हैं। यदि उन्हें पर्वतीय क्षेत्र में वाहन चलाना है, तो यथोचित अभ्यास और विशेष लाइसेंस उन्हें देने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी चाहिए।

Monday, January 12, 2015

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने जनहित कार्यों पर दिया बल

Uttarakhand News, New Delhi - उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने 11 जनवरी को दोपहर में पंचकुइंआ रोड, नई दिल्ली स्थित गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा आयोजित मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर उत्तराखंड की पूर्व भाजपा सरकार में राज्यमंत्री रहे सचिदानंद शर्मा भी उपस्थित थे।

निशंक ने गढ़वाल हितैषिणी सभा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आशा प्रकट की कि संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार जनहित के कार्य करती रहेगी। इस अवसर पर सचिदानंद शर्मा के अलावा गढ़वाल हितैषिणी सभा के पदाधिकारिगण और सैकड़ों उत्तराखंडी उपस्थित थे।

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक का साक्षात्कार

Sunday, January 11, 2015

पवित्र मकरैणी/उतरैणी स्नान मेला 15 जनवरी को सूर यमुना घाट पर

Uttarakhand News, New Delhi - श्री गुरुमाणिकनाथ धाम उत्तराखंड 15 जनवरी 2015 को सुबह 4 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक सूर यमुना घाट, वजीराबाद, दिल्ली में तीसरा विशाल मकरैणी/उतरैणी स्नान मेले का आयोजन करने जा रहा है। उत्तराखंड के इस पवित्र पर्व के आयोजन में पुण्य स्नान हेतु सभी भक्तों को अमंत्रित किया गया है।

उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, भाषा-बोली, रीति-रिवाज, खान-पान और रहन-सहन आदि परंपराओं से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के लिए श्री माणिकनाथ धाम उत्तराखंड प्रतिबद्ध है। मकर संक्रांति के पौराणिक पर्व पर धाम यह सुनिश्चित करता है कि उत्तराखंडी युवा अपनी संस्कृति को अपनाएं।

मकरैणी/उतरैणी स्नान मेला कार्यक्रम इस प्रकार है -
॰ 14 जनवरी रात 11 बजे से उत्तराखंडी ढोल, दमऊं, मस्क-बीन, रणसींग, संग-जागरण तथा उत्तराखंडी कीर्तन
॰ 15 जनवरी सुबह 4 बजे से श्री माणिकनाथ जी की नवद, सभी उत्तराखंडी देवताओं की धुंयाल एवं स्नान प्रारंभ
॰ सुबह 6 बजे से हवन और श्री माणिकनाथ जी को रोठ-भोग, खिचड़ी प्रसाद
॰ सुबह 7 बजे से प्रत्येक कीर्तन मंडली द्वारा उत्तराखंडी कीर्तन, मांगल, संस्कार गीत, थड्या गीत और खुदेण गीतों की प्रस्तुति
॰ देवलसारी कैटर्स निर्मित उत्तराखंडी कौदा और झंगोरा डिश एवं भंडारा वितरण, दोपहर 12 बजे श्री माणिकनाथ जी की आरती, पूर्णाहुति

कर्मपुरा निवासी नंदन सिंह रावत से प्राप्त आमंत्रण पत्र में यह भी सूचित किया गया है कि इस कार्यक्रम के अवसर पर मंच की व्यवस्था केवल महिला कीर्तन मंडलियों के लिए ही की गई है। इस दिन मंच से विशिष्ट व्यक्तियों का परिचय तो होगा, लेकिन आयोजकों ने साफ कर दिया है कि माला और माइक की अपेक्षा न रखी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि केवल वे ही पुरुष भक्त 14 जनवरी रात्रि 11 बजे जागरण हेतु पधारें, जिन्होंने कम से कम दो दिन पूर्व से लहसुन-प्याज़, मांस-मदिरा और कुविचारों का त्याग किया हुआ हो। आयोजन का समापन 15 जनवरी दोपहर 12 बजे किया जाएगा।

Saturday, January 10, 2015

योग को विकास का अस्त्र बनाएं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों बीजापुर अतिथिगृह में डॉ नवीन चंद्र भट्ट की योग पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन किया।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए रावत ने कहा कि सरल भाषा में लिखी गई यह किताब, 'योग और स्वास्थ्य,' योग के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेगी तथा समाज के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। दरअसल 'योग और स्वास्थ्य', लेखक भट्ट के गहन चिंतन, मनन व रिसर्च का परिणाम है और इसमें उन्होंने योग के बारे में विविध जानकारियां समाहित की हैं। भट्ट ने कहा कि योग एक ऐसी विद्या है, जो इंसान की सेहत के लिए तो ज़रूरी है ही, उसके सर्वांगीण विकास के लिए भी अतिमहत्वपूर्ण साबित होती है।

इस अवसर पर प्रो. एच. एस. धामी, उत्तराखंड पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, विधायक राजेश शुक्ला, मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार, समन्वयक जनसंपर्क जसवीर सिंह आदि भी उपस्थित थे।

आप कहेंगे कि एक पुस्तक के विमोचन में ऐसी क्या खास बात है कि हम उस पर इतना विचार कर रहे हैं - मुख्यमंत्री तो अनेक पुस्तकों का विमोचन अक्सर करते ही रहते हैं। नहीं, यह केवल एक किताब का प्रश्न नहीं है, यहां महत्व इस बात का है कि पुस्तक योग पर लिखी गई है।

यह अच्छी बात है कि आज भी उत्तराखंड में योग पर काफी कुछ लिखा और पढ़ा जा रहा है। उत्तराखंड योग की जन्मभूमि है। यह इस पौराणिक राज्य की कुछ सबसे महान और अमूल्य धरोहरों में से एक है। शायद बहुत से लोग यह नहीं जानते कि ऋषिकेश को दुनिया में योग की राजधानी के रूप में जाना जाता है। हजारों की संख्या में विदेशी हस्तियां, जिनमें हॉलीवुड अभिनेता-अभिनेत्रियां और महान पॉप गायक भी शामिल हैं, योग सीखने ऋषिकेश आती रही हैं।

ईश्वर ने उत्तराखंड के अतुलनीय प्राकृतिक संसाधन, तो दिए ही हैं, विशिष्ट संस्कृति का उपहार भी प्रदान किया है और योग उत्तराखंड की संस्कृति का अटूट हिस्सा है। यह दुख की बात है कि योग पर आधारित टूरिज़म का विकास उत्तराखंड में उस तरह से नहीं हो सका है, जैसा कि केरल व कुछ अन्य राज्यों में हुआ है।

हमारे पास योग के अनुकूल वातावरण है, पहाड़ हैं, जंगल हैं, शुद्ध हवा है, गंगा और यमुना का जल है, जड़ी-बूटियां हैं - वह सबकुछ है, जो विदेशी पर्यटकों को खींच लाने के लिए ज़रूरी होता है। कुछ नहीं है तो इन्फ्रास्ट्रकचर और मूलभूत सुविधाएं। हमें अच्छी सड़कें चाहिए, अच्छे होटल चाहिए, 24 घंटे बिजली की सुविधा चाहिए और चाहिए यातायात के बेहतर साधन।

केवल भाषणों में योग की महिमा का बखान करने के बजाय यदि उत्तराखंड सरकार योग के पुनरुत्थान के लिए विशेष योजनाएं बनाए और उनका कुशलता से क्रियान्वयन करे, तो वह राज्य और राष्ट्र दोनोें के लिए बेहतर होगा।

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हरीश रावत की पहली जनअदालत यमकेश्वर के कांडी में लगी

ठिठुरते बेसहारा आदमी से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने पूछे हाल-चाल 

मुख्यमंत्री ने थपथपाई स्कूल मैनेजमेंट की पीठ

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने पर मुख्यमंत्री की बधाई

Thursday, January 8, 2015

हरीश रावत की पहली जनअदालत यमकेश्वर के कांडी में लगी

Uttarakhand News, Pauri - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साल 2015 के पहले ही दिन घोषणा की थी कि राज्य में 26 जनआदालतें लगाई जाएंगी और यमकेश्वर के एक पिछड़े और लगभग उपेक्षित से गांव कांडी से उन्होंने अपनी जनअदालतों का क्रम 6 जनवरी से शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड में जहां नगरीय इलाकों की जनता के लिए भी अपनी समस्याओं के निवारण के लिए डीएम और जनप्रतिनिधि तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि जैसा होता है, वहीं राज्य के एक अतिदुर्गम स्थल पर स्थित गांव कांडी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री अपने दल-बल के साथ पहुंचे और जनअदालत लगाकर ग्रामीणों को  एक-एक करके बुलाया और उनकी समस्याएं सुनीं व अधिकारियों को निर्देश दिए कि समस्याओं का निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए।

बहुत से ग्रामीणों की शिकायत थी कि उनकी पेंशन लंबित पड़ी है, जिस पर रावत ने नाराज़गी प्रकट की और जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि वह खुद ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि पेंशन आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों का अधिकार है और यदि एक महीने के भीतर ऐसे लंबित मामलों का निस्तारण नहीं किया गया, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इस दौरान रावत ने निम्न आदेश दिए -

॰ तिमयाली मोटरमार्ग का मुआवजा आगमी 15 फरवरी तक वितरित किया जाए
॰ गरुड़चट्टी तोक के विद्युतीकरण के लिए वन विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण किया जाए
॰ कौड़िया-किमसार मोटरमार्ग का मामला वाइल्ड-लाइफ बोर्ड के पास ले जाया जाए
॰ ग्राम धारी की पेयजल की समस्या का निस्तारण किया जाए
॰ थागड़ प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति जल्द की जाए
॰ बडौल गांव में पुश्ता व सीसी बनाने की कार्यवाही शुरू हो
॰ पीडीएस का बकाया राश्न लाभार्थियों को जल्द वितरित कराया जाए

इसके अतिरिक्त रावत ने पोखाल से मांडेई तक के 6 किलोमीटर मार्ग के डामरीकरण और तियूरोखाल से निसणी तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क को भी स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने माला ग्रामसभा में नोखाल से मालाकाट मार्ग की शिकायत को गंभीर करार दिया और जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि वह इस मामले को देखें।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने स्व. जगमोहन सिंह नेगी की प्रतिमा का अनावरण किया और कोटद्वार बेस अस्पताल का नाम चंद्रमोहन सिंह नेगी के नाम पर किए जाने की घोषणा की। उन्होंने क्षेत्र की जनता को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि वह अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का निवारण उनके घर पर ही करने का प्रयास करेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, स्थानीय विधायक विजया बर्थवाल, क्षेत्र प्रमुख कृष्णा नेगी, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरोजिनी कैंत्युरा आदि उपस्थित थे।

Tuesday, January 6, 2015

उत्तराखंड सरकार ने किए अफसरों के विभागों में बदलाव

Uttarakhand News, Dehradun - संयुक्त सचिव कार्मिक अतर सिंह के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने डॉ उमाकांत पंवार को सचिव संस्कृति विभाग के पद से अवमुक्त कर दिया है। अमित सिंह नेगी भी खेल युवा कल्याण विभाग के सचिव पद पर कामकाज नहीं करेंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत शायद सचिवों की कार्यकुशलता को बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए जिन सचिवों के पास विभागों की लंबी सूची है, उन्हें कुछेक विभागों के पदभार से मुक्त कर दिया गया है। पंवार के पास तो अभी भी विभागों की एक लंबी सूची है। वह पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा, तीर्थाटन प्रबंधन एवं धार्मिक मेला आदि विभागों का कामकाज देखने के अलावा उत्तराखंड के पयर्टन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं।

सचिव मुख्यमंत्री, लोकनिर्माण विभाग, वित्त, खेल, युवा कल्याण तथा कार्यक्रम निदेशक पीएमयू अमित सिंह नेगी को भी सचिव खेल युवा कल्याण विभाग के पदभार से अवमुक्त किया गया है। उनके शेष कार्यभार यथावत रहेंगे।

उधर, स्टाफ ऑफिसर मुख्य सचिव, प्रभारी सचिव नियोजन, विद्यालयी शिक्षा तथा केंद्र पोषित योजनाएं, डॉ एम.सी. जोशी को भी प्रभारी सचिव प्राथमिक योजनाएं एवं केंद्र पोषित योजनाओं के पदभार से मुक्त किया गया है। उनके अन्य कार्यभार यथावत रहेंगे।

उत्तराखंड सरकार ने मनोज चंद्रन, अपर सचिव वन एवं पर्यावरण और पर्यावरण एवं ठोस अपशिष्ट निवारण विभाग, को भी वर्तमान पदभार से मुक्त करने का फैसला लिया है।

Monday, January 5, 2015

ठिठुरते बेसहारा आदमी से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने पूछे हाल-चाल

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कड़कड़ाती ठंड में सड़क के किनारे सोने पर मजबूर व्यक्ति हाल-चाल पूछे। राज्य की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में हुई बारिश की वजह से ठंड काफी बढ़ गई है और इससे बेघरबार लोगों की हालत बहुत खराब हो गई है।

उत्तराखंड की जनता के लिए हरीश रावत के मन में कितना प्यार है यह बात उस समय और उभरकर सामने आ गई, जब शुक्रवार देर शाम घंटाघर चौराहे का दौरा करते वक्त वह सड़क के किनारे सो रहे एक बेसारा आदमी के पास पहुंच गए और उसका हालचाल पूछने लगे। ऐसे लोगों को सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए राज्य सरकार ने अलाव की लकड़ी के लिए जिलाधिकारियों को चार लाख रुपये दिए हैं। प्रेस व्ज्ञिप्ति में यह भी कहा गया है कि लापरवाही होने पर जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे।

दरअसल रावत सचिवालय में बैठक करने के बाद देर शाम को शहर के भ्रमण पर निकले थे और घंटाघर चौराहे का निरीक्षण कर रहे थे। इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बल्लूपुर चौक होते हुए आई.एस.बी.टी. पहुंचे और वहां हालात ठीक न पाकर उन्होंने वी.सी. एम.डी.डीे.ए. को फोन करके फटकार लगाई। रावत ने कहा कि आई.एस.बी.टी. के संबंध में उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने वी.सी. एम.डी.डीे.ए. को निर्देश दिए कि आई.एस.बी.टी. के बेहतर रखरखाव के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इसके बाद मुख्यमंत्री आई.एस.बी.टी. स्थित रैनबसेरे में सो रहे व्यक्ति से मिले और उसके हालचाल पूछे। रावत ने रैनबसेरे के बेहतर रखरखाव के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में अलाव नहीं जल रहे हैं, वहां पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के इस औचक दौरे में उनके मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार, जसबीर रावत, सलाहकार डॉ संजय चौधरी, हरक सिंह रावत और एस.पी. सिटी अजय सिंह भी उनके साथ मौजूद थे।

Sunday, January 4, 2015

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक का साक्षात्कार

रमेश पोखरियाल "निशंक" के साथ साक्षात्कारकर्ता विनोद जुगलान
Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की पूर्व भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल "निशंक" पिछले दिनों एक कार्यक्रम में भाग लेने श्यामपुर खदरी आए थे। वहां प्रेस-वार्ता के दौरान विनोद जुगलान ने उत्तराखंडन्यूज डॉट ओआरजी के लिए उनका साक्षात्कार किया था। उसका एक दिलचस्प भाग आपके लिए प्रस्तुत है।

विनोद - हरीश दुर्गापाल कांग्रेस में जाने के दो दिन बाद ही उत्तराखंड की राजनीति में बैकफुट पर आ गए हैं। इस विषय में आपका क्या कहना है?

निशंक - आज तो पूरी कांग्रेस सरकार ही बैकफुट पर है। कानून व्यवस्था का कितना बुरा हाल है, यह जनता देख रही है। अभी हरिद्वार जनपद में एक बच्ची से सामूहिक बलात्कार की घटना के चार दिन बाद ही बच्ची मिलती है। रुड़की में दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। उत्तराखंड में अपराधों का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही चला जा रहा है।

विनोद - सत्ताधारी कांग्रेस से जुड़े लोगों का आरोप है कि विकासकार्यों में भाजपा से सहयोग नहीं मिल रहा है।

निशंक - देखिए हम सिर्फ भाजपा के ही लोग नहीं है, बल्कि जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधि भी हैं। हम विकास के हर कार्य में हम राज्य सरकार के साथ हैं और आगे भी रहेंगे, क्योंकि यह कांग्रेस के सहयोग का प्रश्न नहीं है, बल्कि राज्य के विकास का प्रश्न है। उत्तराखंड के विकास के लिए हम हमेशा साथ हैं। यह सर्वथा गलत है कि हम सहयोग नहीं कर रहे हैं।

विनोद - धर्मांतरण का मुद्दा आजकल गरमाया हुआ है। इस विषय पर आपका क्या कहना है?

निशंक - आज स्वर्गीय पूज्यात्मा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी जी की पुण्यतिथि का कार्यक्रम है...फिर कभी (यह कहकर निशंक जी ने इस सवाल को टाल दिया।)

इसके बाद पत्रकार बंधुओं का आभार प्रकटकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक जी ने विदा ले ली।

Saturday, January 3, 2015

उत्तराखंड के नैनीताल में बर्ड फेस्टिवल फरवरी 4-8

Image: uttarakhandbirdfestival.in/ से साभार
Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के नैनीताल जिले स्थित पावलगढ़ कंज़रवेशन रिज़र्व (Pawalgarh Conservation Reserve) में पांच दिवसीय उत्तराखंड स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल का आयोजन फरवरी 4-8, 2015 के दौरान किया जाएगा।

उत्तराखंड फोरेस्ट डिपार्टमेंट की इको-टूरिज़म विंग ने फरवरी 2012 से उत्तराखंड बर्ड वॉचिंग प्रोग्राम के आयोजन की शुरुआत की थी। वेबसाइट में यह दाावा भी किया गया है कि पिछले दो सालों के दौरान उत्तराखंड के विभिन्न पक्षी विहारों में 24 बर्ड वॉचिंग शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 500 वनकर्मियों, नेचर गाइडों, टूर-ऑपरेटर्स, विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने भी भाग लिया है।

बताया जाता है कि ऐेसे आयोजनों का उद्देश्य उत्तराखंड को बर्ड-वॉचिंग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में विकसित और प्रस्तुत करना है।

Friday, January 2, 2015

उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर आज फिर भारी बर्फबारी

भारी बर्फबारी से उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर बर्फ की चादर और मोटी हो गई।

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर आज सुबह से भारी हिमपात हो रहा है, जिससे पर्वतों के शिखरों पर जमी बर्फ की चादर और मोटी हो गई और मैदानी क्षेत्रों में ठिठुराहट बढ़ गई है।

आज राज्य के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के ऊंचे पहाड़ों पर फिर से भारी बर्फबारी हुई। इसके साथ ही मैदानी इलाकों मे बरसात हुई, जिससे पारा गिर गया। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री, मुनश्यारी, धारचुला और ओली सब जगह हिमपात होने की वजह से पूरे राज्य में ठंड काफी बढ़ गई। उत्तरप्रदेश और दिल्ली तक में इसकी वजह से मौसम में बदलाव देखा गया। 

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों तक राज्य में ऐसा मौसम बना रह सकता है। 

उत्तराखंड के वन विकास निगम को और अधिकारों की पैरवी

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गत सोमवार, 29 दिसंबर के अपने कुमाऊं दौरे के दौरान बीजापुर अतिथि-गृह में वन विकास निगम के कार्यों की समीक्षा की तथा निगम को बेहतर कार्य संचालन के लिए अन्य राज्यों की तरह अधिकार दिए जाने पर बल दिया। रावत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जंगलों में सूखे और जमीन पर पड़े वृक्षों का निगम छपान करे और उनके बेहतर विपणन की व्यवस्था करे। मुख्यमंत्री ने जंगल में बहने वाले छोटे नदी-नालों को भी खनन के दायरे में लाने के निर्देश निगम को दिए।

वन विकास निगम के काम-काज की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि निगम अपना वर्किंग प्लान बनाए। उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रमुख वन संरक्षक को यह भी निर्देश दिए कि जंगलों में सूखे और जमीन पर पड़े वृक्षों के छपान का अधिकार निगम को दिया जाए और महाप्रबंधक व कंजरवेटर की समिति का गठन  किया जाए।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने वाइल्ड लाइफ बोर्ड के गठन और माडर्न माइनिंग प्लान के लिए कार्ययोजना शीघ्र बनाने का निर्देश दिया।

बैठक में भाग लेने वालों में वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी, प्रमुख सचिव वन डॉ रणवीर सिंह, पीसीसीएफ एसएस शर्मा, प्रबंध निदेशक श्रीकांत चंदोला, अपर सचिव कर दिलीप जावलकर और महाप्रबंधक विनीत कुमार पांगति प्रमुख थे।

Thursday, January 1, 2015

उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी की ओर से नववर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएं

Uttarakhand News, New Delhi - आप सभी दोस्तों को उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी की ओर से नववर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सुख, समृद्धि, सुकून और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्रदान करें।

कुछ मित्रों को आपत्ति है कि यह तो पश्चिमी सभ्यता का नववर्ष है। हिंदुओं का नववर्ष तो बाद में आएगा। मेरा उन्हें सुझाव है कि जीवन में उत्सव मनाने का कोई मौका कभी न गंवाएं। आज के आपा-धापी भरे युग में खुशी मनाने के अवसर दुर्लभ हैं और इंसान का जीवन बहुत छोटा-सा है। इसलिए जब भी खुशी मनाने का कोई भी बहाना मिले, उसे एक जश्न की तरह मनाएं और सदा स्वस्थ रहें, खुश रहें।

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं एक बार फिर।

उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी
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