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Wednesday, January 14, 2015

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकृत लाइसेंसधारी ही चलाएं वाहन

Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड की अलकनंदा कमांडर टैक्सी समिति ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री हरीश रावत से मांग की कि अन्य राज्यों के जो वाहन चार धाम की यात्रा पर आते हैं, उन्हें हरिद्वार या ऋषिकेश में ही रोक दिया जाए। समिति ने यह भी मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों में केवल उन्हीं वाहन चाहकों को गाड़ी चलाने की अनुमति दी जए, जिनके लाइसेंस पर्वतीय क्षेत्र में वाहन चलाने हेतु अधिकृत हों।

क्या आपको समिति की मांग जायज़ लगती है? जब उत्तराखंड के लोगों के पास यह अधिकार है कि वे देश के किसी भी कोने में जाकर रोजगार करें, तो अन्य राज्य के लोगों की उत्तराखंड में निर्बाध आवागमन को कैसे बाधित किया जा सकता है। क्या मांगें धीरे-धीरे क्षेत्रीय कट्टरपन को प्रश्रय नहीं देतीं? सतही तौर पर देखने में यह जरूर लगता है कि टैक्सी समिति अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार से ऐसे निर्णय लेने की मांग कर रही है, जिससे अन्य राज्यों के टैक्सी चालक चार धाम की यात्रा पर सवारियों को न ले सकें और यह उत्तराखंड के टैक्सी चालकों के लिए एक तरह से आर्थिक आरक्षण का काम करेगा।

पर मेरी निजी राय तो यह है कि कहीं न कहीं टैक्सी धारकों की मांग उत्तराखंड और अन्य राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के हित में ही है। अक्सर देखा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन चलाने की अनुभव की कमी के चलते बाहरी टैक्सी चालक दुर्घटनाओं का सबब बन जाते हैं। यदि उन्हें पर्वतीय क्षेत्र में वाहन चलाना है, तो यथोचित अभ्यास और विशेष लाइसेंस उन्हें देने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी चाहिए।

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