उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने की गूजरों की समस्याओं की समीक्षा


Uttarakhand News, Dehradun - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों राज्य सचिवालय में वन गूजरों की समस्याओं और उनके बच्चों की शिक्षा की गहनता से समीक्षा की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग व वन विभाग के अधिकारी वन गूजरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में कृषि मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ओम प्रकाश, प्रमुख वन संरक्षक एमसी शर्मा, सचिव भास्करानंद व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने वन गूजरों की समस्याओें के निस्तारण पर सचिवालय में बैठ कर बातचीत की हो। पूर्व सरकारों के कार्यकाल में भी वन गूजरों की समस्याओं पर मगरमच्छी आंसू बहाए गए थे। कहते हैं कि जब गूजरों ने सन 1820 के आसपास यूरोपियन आक्रांताओं को अपनी जमीन से खदेड़ने की कोशिश की थी, तो निर्मम अंग्रेज शासकों ने उनमें से 200 को मार गिराया था और सरदार कलुवा गूजर का सिर काटकर देहरादून जेल के बाहर टांग दिया था। 1947 में अंग्रेज चले गए, पर वन गूजरों की हालत आज भी लगभग जस-की-तस है। वे आज भी आदिम अवस्था में रहने को अभिशप्त हैं। घास-फूस की झोपड़ियों में रहने वाले गूजर आजीविका के लिए आज भी पशुपालन पर निर्भर हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के साधन और लोकतांत्रिक अधिकार क्या होते हैं, अधिकांश गूजर इन बातों से अनभिज्ञ हैं।

ऐसे में हरीश रावत यदि वन गूजरों की समस्याओं का समाधान करने को तत्पर दिखते हैं, तो यह उत्तराखंड के गूजर समुदाय के लिए एक अच्छा संकेत है।

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