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Thursday, January 15, 2015

15-20 उत्तराखंडियों को दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट देंगे नागमणि

From right: Bharat Rawat, Samras Samaj Party Supremo Nagmani, others.
Uttarakhand News, New Delhi - भरत रावत के बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं। यह वही शख्स है जिसने आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने का लगभग आत्मघाती-सा लगने वाला फैसला किया था। वह उत्तराखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाने का दावा करते हैं।

आज दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में उन्हें देखा, जहां वह समरस समाज पार्टी की प्रेस वार्ता में भाग लेने आए थे, तो आंखों के सामने एक ठेठ उत्तराखंडी चेहरा तैर गया। छोटा कद, गोरा रंग, सिर पर पहाड़ी टोपी और आंखों में कुछ कर-गुज़रने की अटूट ललक। आज के युग में जब अधिकांश लोग छोटे-बड़े आयोजनों के दौरान मंच पर या उसके आसपास मंडराने की कोशिश में लगे रहते हैं, भरत एक ठेठ उत्तराखंडी की तरह स्टेज से दूर रिपोर्टरों के बीच बैठे नज़र आए। दिल्ली में बसे उत्तराखंडियों की अगली पीढ़ी को योग्य प्रतिनिधित्व देने में वह सक्षम है, उन्हें देखकर और उनसे बात करके यह अहसास हो जाता है।

तो अब बात करते हैं नवगठित समरस समाज पार्टी की, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि दावा करते हैं कि उनकी पार्टी दिल्ली में रह रहे पूर्वांचल और उत्तराखंड के प्रवासियों की एकमात्र राजनीतिक पार्टी है। नागमणि के अनुसार उनके दल का उद्देश्य दिल्ली में पूर्वांचल-उत्तराखंड प्रवासियों की सरकार का गठन करना है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि दिल्ली के 80 प्रतिशत लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली समरस समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में विजय की पताका ज़रूर फहराएगी। उनकी प्रेस-विज्ञप्ति में अरविंद केजरीवाल की तुलना नटवरलाल और डॉ गोबूल्स से की गई है। डॉ गोबूल्स का प्रचार सिद्धांत था कि यदि झठी बातों को बार-बार दुहराया जाए, तो लोग उसे सत्य समझने लग जाते हैं।

उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "आम आदमी पार्टी अब आम लोगों की पार्टी नहीं रही, बल्कि पूंजीपतियों की पार्टी बन गई है। दिल्ली में एक होर्डिंग के लिए प्रत्येक महीने 3 लाख रुपये का भुगतान सरकार को देना होता है। इस तरह के 10,000 होर्डिंग दिल्ली में लगाए गए हैं। यानी 3 हजार करोड़ रुपये प्रत्येक माह खर्च हो रहा है। इसका मतलब है कि केजरीवाल करोड़ों रुपये प्रचार पर खर्च कर रहे हैं। मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि सी.बी.आई. से जांच करवाई जाए।"

नागमणि से पत्रकारों ने पूछा कि केजरीवाल के होर्डिंग पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का आंकड़ा उन्होंने किस सोर्स से लिया है, तो वह कोई तथ्यात्मक उत्तर नहीं दे सके।

नागमणि ने यह भी बताया कि उत्तराखंड के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे उनके कार्यालय में मिला था। दिल्ली में उत्तराखंडियों की भारी जनसंख्या होने के बावजूद कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंडियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में टिकट न देकर उनकी घोर उपेक्षा की है। नागमणि ने उत्तराखंड के लोगों को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में 70 में से 15-20 सीटों पर चुनाव लड़ाने की बात भी कही।

अब यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी है कि भरत समरस समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ेगें या बिना किसी बैनर के, पर एक बात तो तय है कि उत्तराखंडियों का असीम स्नेह भरत को मिलता रहेगा - दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान भी और उसके बाद भी।

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