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Saturday, March 28, 2015

क्या स्वयंभू ईमानदार पार्टी की बैठक बन गई गुंडों का जमावड़ा

Uttarakhand News - कहते हैं सत्ता निरंकुश होती है। सत्ता इन्सान का दिमाग खराब कर देती है। सत्ता के लिए दोस्त ही दोस्त का दुश्मन हो जाता है। सत्ताधारी नेता सारी ताकत अपने हाथ में रखना चाहता है और साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह विरोधियों का संपूर्ण सफाया करने को तत्पर रहता है।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आज जो कुछ होने का आरोप योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण लगा रहे हैं, उससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईमानदार पार्टी होने का दावा करने वाला दल वास्तव में भाड़े के गुंडों का जमावड़ा गया है। बताया जाता है कि बैठक में लगभग 300 लोग थे और सिर्फ आठ लोगों ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा को पाट्री की राष्ट्रीय कार्यसमिति से निकालने का विरोध किया। योगेंद्र यादव ने तो यह भी दावा किया कि 167 सदस्यों से पहले ही हस्ताक्षर करा लिए गए थे। बैठक पूरी तरह से स्क्रिप्टिड थी।

योगेंद्र यादव ने आगे कहा - बैठक में बाउंसर बुलाए गए थे और हमारे साथी को धसीटा गया।

प्रशांत भूषण ने कहा - न्यूट्रल अॉबसर्वर को बैठक में बुलाया नहीं गया, पार्टी के लोकपाल को बैठक में आने से मना कर दिया।

प्रो. आनंद कुमार ने कहा - मैं बैठक में बोलना चाहता था, पर अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया गया। रहमान साहब को बैठक में चोट लगी, उन्हें ई-रिक्शा में बैठकर लाना पड़ा। मैं अब आम आदमी पार्टी का आम वालन्टियर हूं, उसी के तहत पार्टी में योगदान दूंगा।

पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद धर्मवीर गांधी और दिल्ली के दो विधायकों (पुष्कर और देवेंद्र सहरावत) ने प्रस्ताव का विरोध किया। आम आदमी पार्टी के लिए शुरुआत से खून-पसीना एक करने वाले रमजान चौधरी ने टीवी चैनलों के कैमरों के आगे दयनीय और लुटी-पिटी हालत में कहा - मुझे जूतों से पीटा गया।

उधर, आम आदमी पाट्री के नेता आशुतोष ने कहा - योगेंद्र यादव झूठ बोल रहे हैं, बैठक में कोई मार-पीट नहीं हुई।

सच क्या है और झूठ क्या है, यह तो सिर्फ वही लोग जानते है जो कि बैठक में बंद दरवाज़े के अंदर बैठे थे, पर यह तो सच है कि कल जारी किए गए एक स्टिंग में यही सबकुछ करने की बात आआपा के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कही थी। अगर योगेंद्र यादव और साथियों पर भरोसा किया जाए, तो ऐसा प्रतीत होता है कि जिस दल ने सार्वजनिक जीवन में शुचिता और ईमानदारी की बात करके चुनाव में जीत हासिल की थी, उसका दामन पूरी तरह से साफ नहीं है।

आम आदमी पार्टी वही महान राजनीतिक दल है, जिसने दिल्ली के 36 लाख उत्तराखंडियों की घोर उपेक्षा करते हुए, दिल्ली विधानसभा चुनावों में एक भी उत्तराखंडी को उम्मीदवार नहीं बनाया था। केवल उत्तराखंडी ही नहीं, बल्कि आज तो दिल्ली का आम मतदाता पछता रहा होगा कि पांच साल के लिए अपना भविष्य उसने कैसे लोगों के हाथों में सौंप दिया है।

Thursday, March 26, 2015

उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के नए कर्णधार क्या भला करेंगे कांग्रेस का

Uttarakhand News - कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, जनार्दन द्विवेदी, ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके सूचना दी है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति के लिए मनोनीत सदस्यों के नामों को अपनी स्वीकृति दे दी है।

जिस तरह से कांग्रेस ने भारी संख्या में उपाध्यक्ष और महासचिव व सचिव पद बांटे हैं, उससे लगता है कि सूची बनाते समय सभी प्रभावशाली गुटों को खुश करने की भरपूर कोशिश की गई है। वैसे भी पहले केंद्र और उसके बाद एक-एक करके कई राज्यों में बुरी तरह से शिकस्त खाने के बाद कांग्रेस के पास कोई और चारा ही नहीं बचा है। अब तो जो साथ हैं, उन्हें खुश रखा जाए इसी में भलाई है, वरना डूबती हुई नाव में सवारी कौन करना चाहेगा।

देश की राजनीति के महासमुद्र में फिलहाल कांग्रेस की नाव डूबती नज़र आ रही है, पर फिर भी उत्तराखंड कांग्रेस के पद बांटने में भाई-भतीजावाद को पूरा प्रश्रय दिया गया है। आप सूची में दर्ज नाम पढ़ेंगे, तो खुद ही समझ जाएंगे कि उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के सबसे बड़े नाम से लेकर उनके सिपहसालारों के रिश्तेदारों तक सभी को उत्तराखंड कांग्रेस के पदों की बंदरबांट का लाभ मिला है। इस बंदरबांट का क्या लाभ कांग्रेस को 2017 के विधानसबा चुनावों में मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

खैर विज्ञप्ति में दर्ज सूचना के अनुसार प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद किशोर उपाध्याय के पास ही रहेगा, जबकि सुनील गुलाटी को कोषाध्यक्ष पद दिया गया है।

उपाध्यक्ष पद निम्न लोगों को दिया गया है - रवींद्र जैन, महेंद्र पाल, एसपी सिंह, अब्दुल रजा, रण विजय सिंह सैनी, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, जोत सिंह बिष्ट, भगीरथ भट्ट, राम प्रसाद टम्टा, शेरसिंह नौलिया, शंकर चंद रमोला, शिवकुमार मित्तल, सुरेश वाल्मीकि, जया बिष्ट, सरदार साहेब सिंह, काजी निजामुद्दीन, संतोष चौहान, रमेश पांडे, शकुंतला दत्ताल, भुवन नौटियाल, हलदर, मनोहर लाल शर्मा।

महासचिव पद पाने वाले लोगों के नाम हैं - राजेश जुवांठा, करण मेहरा, ओपी चौहान, अरेंद्र शर्मा, राजपाल खरोला, राजपाल बिष्ट, आनंद रावत, ज्योति नेगी, दिनेश व्यास, अनुपम शर्मा, डा. केएस राणा, डा. इरशाद, जगत लाल खाती, खजान पांडे, मोहन पाठक, हरीश पनेरू, घनानंद नौटियाल, गोदावरी थापली, रामसिंह केरा, विजय सिजवाली, यामीन अंसारी, शिल्पी अरोड़ा, सुबोध राकेश, सतपाल ब्रह्मचारी, जयपाल जाटव, मास्टर सतपाल, प्रदीप बागवारी, नवीन जोशी।

सचिव पद की शोभा बढ़ाने वाले लोगों के नाम हैं - सुलेमान अंसारी, सुनीता प्रकाश, दीप सती, तारक बंसल, दलजीत गुराया, राजकुमार शाह, संजय किशोर, ललित जोशी, विवेक डोबरियाल शर्मा, शराफत खान, लता जज, अनुपमा रावत, ममता गुरंग, मंजू डोभाल, गोपाल चमोली, दिलशाद कुरैशी, विमल सजवाण, महेश शर्मा, ज्योति रौतेला, नत्थीलाल शाह, महेंद्र सिंह नुंथी, कुमुद शर्मा, मूर्ती सिंह नेगी, राम पांडे, सूरज राणा, जयप्रकाश नौटियाल, अशोक धीमान, गणेश उपाध्याय, राजेंद्र कंडवाल, संजय डोभाल, दीप बोहरा, पूनम भगत, अश्वनी कुमार, मीना बछावन, ताहिर अली, महेश जोशी, दानसिंह राणा, आशा टम्टा, मोहन गोस्वामी, पुष्पा गोस्वामी।

Monday, March 23, 2015

हिम उत्तरायणी पत्रिका के लोकार्पण समारोह के बहाने एक साहित्यिक योगी से मुलाकात

Uttarakhand News - पांचजन्य के सहयोगी संपादक सूर्य प्रकाश सेमवाल और उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और कांग्रेस नेता नंदन सिंह रावत ने जब मुझे हिम उत्तरायणी के लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया, तो मुझे बहुत खुशी हुई कि उत्तराखंडी समाज अपनी संस्कृति और साहित्य को लेकर कितना जागरुक है। हिम उत्तरायणी का अर्थ मैंने अपनी जानकारी के हिसाब से कर लिया, क्योंकि नंदन सिंह रावत उत्तरायणी पर्व के दिन को राजकीय अवकाश घोषित करवाने के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। कार्यक्रम मेरी उम्मीद से ज़्यादा लाभकर सिद्ध हुआ।
महान साहित्यिक योगी डॉ नरेंद्र कोहली का सम्मान करते नंदन सिंह रावत
रविवार, मार्च 22, 2015 को अटल सहयात्रियों का अभिनंदन एवं हिम उत्तरायणी पत्रिका का लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में भाग लेने मैं नंदन सिंह रावत और उत्तराखंड के युवा कलाकार मयंक आर्या के साथ 3 बजे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित अणुव्रत भवन में पहुंचा और हमें वहां अनेक महान साहित्यकारों, शिक्षाविदों और राजनीतिज्ञों के सान्निध्य का अवसर प्राप्त हुआ।
जब हमने यथोचित रूप से सुसज्जित और पवित्रता से नहाए चमचमाते हॉल में प्रवेश किया, तो वातावरण में राजनीतिक गहमागहमी की हल्की-सी गर्माहट-सी थी। वहां खुसर-पुसर हो रही थी कि पता नहीं मुरली मनोहर जोशी कब तक पहुंचेंगे। लेकिन कुछ ही समय बाद धीरे-धीरे वातावरण में साहित्य की पवित्रता किसी पुष्प की सुगंध की तरह फैल गई। एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक हॉल में बैठे सभी लोग मंत्र-मुग्ध होकर पहले युवा कवि राधाकांत पांडे का कविता पाठ और उसके बाद मूर्धन्य साहित्यकार और हिंदी में नई कहानी आंदोलन के एक सशक्त हस्ताक्षर डॉ नरेंद्र कोहली के संस्मरणात्मक संबोधन को सुनने लगे।

बाद में कार्यक्रम के आयोजक सूर्य प्रकाश सेमवाल ने स्पष्ट कर दिया कि मुरली मनोहर जोशी की अनुपस्थिति में डॉ कोहली ही कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहेंगे, तो एक तरह से मुझे तो अच्छा ही लगा। नेताओं को तो हम हमेशा सुनते हैं, पर पौराणिक चरित्रों को लेकर आधुनिक महाकाव्यों की रचना करने वाले डॉ कोहली को सुनना कलयुग में पुण्य कमाने जैसा ही है। डॉ कोहली ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताया समय याद किया, बताया कि कितने सहृदय हैं अटल जी, समझाया कि वे वास्तव में कवि हृदय हैं और व्याख्यायित किया कि अटल जी वक्त के साथ बड़े, और बड़े राजनेता होते गए, पर एक व्यक्ति और मित्र के रूप में वह कभी नहीं बदले।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि ने की और उन्होंने भी अटल जी के साथ बिताए वक्त को बहुत शिद्दत औऱ अत्यंत भावुकता से याद किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ नवीन कुमार जग्गी, अणुव्रत के प्रबंधक नहाटा जी और राधा कृष्ण मनोड़ी ने भी विचार व्यक्त किए। अटल जी के साथ सालों तक रहे उनके सहयोगियों का स्वागत भी इस अवसर पर किया गया, इनमें महान उत्तराखंडी साहित्यकार डोभाल जी भी शामिल थे।
जगदीश मंमगाईं को सम्मानित करते डॉ नरेंद्र कोहली
वास्तव में उत्तराखंड का समुचित प्रतिनिधित्व इस दौरान देखने में आया। दिल्ली में उत्तराखंडियों का नेतृत्व करने वाले एकीकृत एमसीडी की कंस्ट्रक्शन कमेटी के पूर्व चेयरमैन व भाजपा नेता जगदीश ममगाईं, डीपीएमआई के ओनर व भाजपा नेता डॉ विनोद बछेती, नंदन सिंह रावत, अनिल कुमार पंत, पत्रकार वेद उनियाल और रविंद्र बिष्ट भी इस मौके पर वहां उपस्थित थे। कार्यक्रम के आयोजकों ने उन सभी को डॉ कोहली के हाथों शॉल और स्मृति-चिह्न प्रदान करवाकर कराया। मैं तो हैरान था कि मुझे भी इस अवसर पर इसी तरह से सम्मानित किया गया। डॉ कोहली का हाथ अपने कंधे पर महसूस करके मैंने वह अनंत व अलौकिक ऊर्जा भी अनुभव की, जिसने साहित्य के इस महान पुरोध को 100 से अधिक पुस्तकें लिखने का साहस और योग्यता प्रदान की।
डॉ विनोद बछेती को स्मृति-चिह्न प्रदान करते डॉ कोहली। 
अनिल कुमार पंत को स्मृति-चिह्न प्रदान करते पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि। 
नंदन सिंह रावत का भी एक अलग ही रूप इस मौके पर देखने को मिला। कम से कम मैं तो हैरान रह गया, जब सेमवाल जी ने मंच से घोषणा की कि हिम उत्तरायणी पत्रिकता से सह संपादक नंदन सिंह रावत हैं। मैं निजी रूप से रावत जी और सेमवाल जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा कि कार्यक्रम में निमंत्रित किया औऱ ऐसे महान तपस्वियों के सान्निध्य का सुख और पुण्य कमाने का अवसर प्रदान किया।

Thursday, March 19, 2015

गढ़वाल भवन मामले में एसएचओ के लाइनहाज़िर होने की बात सच या झूठ?

Uttarakhand News - गत रविवार मैं दिल्ली में पंचकुंइयां रोड पर स्थित गढ़वाल भवन गया, तो सबसे पहले गेट पर लगे इस नोटिस पर मेरी नज़र पड़ी। सेल पर लगी सील से गढ़वाल भवन से जुड़े लोग ही नहीं समस्त उत्तराखंडी समाज के लोगों को इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है।
गढ़वाल भवन और उसके गेट पर लगा नोटिस।
आज सारा दिन उत्तराखंडी समाज में इस बात की चर्चा हो रही थी कि गढ़वाल भवन मामले में मंदिर मार्ग थाने के एसएचओ को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। बहुत से लोगों ने तो फेसबुक पर गढ़वाल भवन के पदाधिकारियों को बधाई भी दे दी। यह सच है या कोरी अफवाह, यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी हुई है। पर कुछ भी हो मामला काफी दिलचस्प नज़र आ रहा है।

गढ़वाल भवन वैसे भी अकसर चर्चा का विषय बना रहता है। इन निरर्थक चर्चाओं का केंद्र रहती है गढ़वाल भवन का संचालन करने वाली कमेटी के चुनाव में शिरकत करने वाले गुटों के बीच की राजनीति। ऐसा माना जाता है कि यहां चुनाव लड़ने वाले बहुत से लोग उत्तराखंड या दिल्ली की राजनीति में अपना भविष्य देख रहे होते हैं। अब सच कुछ भी हो, पर इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि गढ़वाल भवन में लगने वाली इकोनॉमी सेल को फिलहाल तो एनडीएमसी ने सील कर दिया है। सेल पर लगी सील में गढ़वाल भवन के पदाधिकारियों का कितना हाथ है, यह तो वे खुद ही जानते होंगे।

Tuesday, March 17, 2015

मां चंद्रवदनी मंदिर को बद्री-केदार की तरह धाम के रूप में मान्यता दिलाने की मुहिम

Uttarakhand News - गैर-सरकारी संगठन भयात के तत्वावधान में मार्च 15 को सुबह 11 बजे दिल्ली के पंचकुइयां मार्ग स्थित गढ़वाल भवन में एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें - देव संस्कृति बचाओ - अभियान के तहत दिल्ली की उत्तराखंड मूल की जनता का आह्वान किया गया कि वह चैत्र नवरात्र (मार्च 20 से 28, 2015) के दौरान टिहरी गढ़वाल में लगने वाले नौ दिवसीय नवरात्र आयोजन में भारी संख्या में भागीदारी करे।
बैठक की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ विनोद बछेती ने की और उन्होंने अपने संबोधन में उत्तराखंड के लिए पर्यटन उद्योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अनिल कुमार पंत ने सुझाव दिया कि देव संस्कृति बचाओ अभियान के तहत उत्तराखंड के पौराणिक महत्व वाले सभी उपेक्षित धर्म स्थलों के बारे में जानकारी का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि उन सभी का विकास सुनिश्चित किया जा सके।


क्या किसी क्षेत्र-विशेष के लोग अपने प्रयासों से अपने इलाके में स्थित किसी मंदिर को इतना प्रसिद्ध करवा सकते हैं कि पूरी दुनिया में उसे बद्रीनाथ, केदारनाथ या यमनोत्री-गंगोत्री जैसी मान्यता मिल जाए? इस विषय पर बैठक में मौजूद लोगों में एकमत नहीं था। पर दिलचस्प बात यह रही कि सभी लोग मां चंद्रवदनी धाम के प्रचार-प्रसार को लेकर पूरी तरह गंभीर थे और तन-मन-धन से काम करने को पूरी तरह तत्पर थे।

रोशनी चमोली ने बैठक में जानकारी दी कि मां चंद्रवदनी की पहली यात्रा दिल्ली से मार्च 26 को टिहरी गढ़वाल के लिए रवाना होगी। बैठक में अनेक लोगों ने मां चंद्रवदनी के मंदिर स्थल को धाम के रूप में मान्यता दिलाने के मंत्री प्रसाद नैथानी के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इस अवसर पर रोशनी चमोली, सूरज रावत, भरत रावत, अनिल कुमार पंत, देव सिंह रावत, सतेंद्र रावत, बी.एस. रावत, दर्शन सिंह रावत, किरन केंथोला, मनोज जुगरान और जगजीत बिष्ट आदि ने भी विचार व्यक्त किए। 

Monday, March 16, 2015

मां चंद्रबदनी की पहली यात्रा दिल्ली से मार्च 26 को करेगी प्रस्थान

Uttarakhand News - भरत रावत ने यह विज्ञप्ति भेजी है -

मित्रों मुझे यह बताते हुए बहुत ही हर्ष हो रहा है कि कल गढ़वाल भवन में "देव संस्कृति बचाओ अभियान" के तहत माँ चन्द्रबदनी सिद्धपीठ को धाम बनाने हेतु की गयी बैठक सफल रही है और आप सभी मित्रों के प्रयास से पहली यात्रा इन नवरात्रों में 26 मार्च को दिल्ली से बसों द्वारा निकाली जा रही है जिसके लिये 175 से अधिक माता के भक्तों ने जाने का संकल्प लिया है...; यह यात्रा दिल्ली 26 मार्च को दिल्ली से "माँ चन्द्रबदनी" धाम एवं "नीलकंठ महादेव" होते हुए 28 मार्च को दिल्ली वापसी होगी, जिसके लिये नाममात्र का शुल्क 1000/- प्रति व्यक्ति लिया जा रहा है, जिसमें आने जाने का किराया, खाने एवं ठहरने की व्यवस्था शामिल हैयदि आप भी इस यात्रा से जुड़ना चाहते हैं तो संपर्क करें -
09811526475 / 09999338404 09350535391 / 011-42765391
---- भरत रावत 

Tuesday, March 3, 2015

उत्तराखंड की जर्जर सड़कों और खस्ताहाल बसों से यात्रियों की जान खतरे में

Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (Uttarakhand Chief Minister) हरीश रावत ने कहा है कि राज्य के उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि श्रमिक और सेवायोजकों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध हों। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और श्रममंत्री ने प्रेस विज्ञप्तियां जारी करके राज्य में विभिन्न उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।। लेकिन यही लोग उत्तराखंड की जर्जर सड़कों में खस्ताहाल सरकारी वाहनों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सजग क्यों नहीं हैं, यह मेरे लिए हैरानी का विषय है। कितने ही उत्तराखंडी युवक, महिलाएं, बच्चे और वृद्ध हर साल इन खूनी सड़कों और वाहनों की भेंट चढ़ जाते हैं। पर शासन और प्रशासन हैं कि उनकी नींद टूटती ही नहीं।
उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हरीश रावत ने श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति ये विचार "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" के अवसर पर प्रकट किए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों का आह्वान किय है कि सभी उद्यमी और श्रमिक यह सुनिश्चित करें कि उनमें परस्पर सहभागिता और सहयोग का वातावरण पनपे और उनमें मधुर संबंध स्थापित हों। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी संबंधित पक्षों को उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा के बारे में अत्यधिक सजग रहना चाहिए।

इससे पहले उत्तराखंड के श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने यह घोषणा की थी कि भारत के अन्य प्रांतों की तरह ही उत्तराखंड में भी 4 मार्च के दिन को "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही 4 मार्च से ही "राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह" का आयोजन भी किया जाएगा।

ऐसे आयोजनों का स्वागत किया जाना चाहिए। उत्तराखंड के उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है और यदि उत्तराखंड सरकार इसके लिए सजग दिखाई देती है, तो यह एक उत्तम लक्षण ही है। परंतु हैरानी औऱ उससे भी ज्यादा यह दुख की बात यह है कि यही उत्तराखंड सरकार राज्य में हर साल सैकड़ों लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने के बावजूद कोई सशक्त सड़क परिवहन नीति लाने में सर्वथा विफल ही रही है। खासतौर से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों और सरकारी परिवहन निगम की बसों की हालत जर्जर है। हरीश रावत सरकार को इनकी सुध भी लेनी चाहिए।