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Monday, March 23, 2015

हिम उत्तरायणी पत्रिका के लोकार्पण समारोह के बहाने एक साहित्यिक योगी से मुलाकात

Uttarakhand News - पांचजन्य के सहयोगी संपादक सूर्य प्रकाश सेमवाल और उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और कांग्रेस नेता नंदन सिंह रावत ने जब मुझे हिम उत्तरायणी के लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया, तो मुझे बहुत खुशी हुई कि उत्तराखंडी समाज अपनी संस्कृति और साहित्य को लेकर कितना जागरुक है। हिम उत्तरायणी का अर्थ मैंने अपनी जानकारी के हिसाब से कर लिया, क्योंकि नंदन सिंह रावत उत्तरायणी पर्व के दिन को राजकीय अवकाश घोषित करवाने के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। कार्यक्रम मेरी उम्मीद से ज़्यादा लाभकर सिद्ध हुआ।
महान साहित्यिक योगी डॉ नरेंद्र कोहली का सम्मान करते नंदन सिंह रावत
रविवार, मार्च 22, 2015 को अटल सहयात्रियों का अभिनंदन एवं हिम उत्तरायणी पत्रिका का लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में भाग लेने मैं नंदन सिंह रावत और उत्तराखंड के युवा कलाकार मयंक आर्या के साथ 3 बजे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित अणुव्रत भवन में पहुंचा और हमें वहां अनेक महान साहित्यकारों, शिक्षाविदों और राजनीतिज्ञों के सान्निध्य का अवसर प्राप्त हुआ।
जब हमने यथोचित रूप से सुसज्जित और पवित्रता से नहाए चमचमाते हॉल में प्रवेश किया, तो वातावरण में राजनीतिक गहमागहमी की हल्की-सी गर्माहट-सी थी। वहां खुसर-पुसर हो रही थी कि पता नहीं मुरली मनोहर जोशी कब तक पहुंचेंगे। लेकिन कुछ ही समय बाद धीरे-धीरे वातावरण में साहित्य की पवित्रता किसी पुष्प की सुगंध की तरह फैल गई। एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक हॉल में बैठे सभी लोग मंत्र-मुग्ध होकर पहले युवा कवि राधाकांत पांडे का कविता पाठ और उसके बाद मूर्धन्य साहित्यकार और हिंदी में नई कहानी आंदोलन के एक सशक्त हस्ताक्षर डॉ नरेंद्र कोहली के संस्मरणात्मक संबोधन को सुनने लगे।

बाद में कार्यक्रम के आयोजक सूर्य प्रकाश सेमवाल ने स्पष्ट कर दिया कि मुरली मनोहर जोशी की अनुपस्थिति में डॉ कोहली ही कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहेंगे, तो एक तरह से मुझे तो अच्छा ही लगा। नेताओं को तो हम हमेशा सुनते हैं, पर पौराणिक चरित्रों को लेकर आधुनिक महाकाव्यों की रचना करने वाले डॉ कोहली को सुनना कलयुग में पुण्य कमाने जैसा ही है। डॉ कोहली ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताया समय याद किया, बताया कि कितने सहृदय हैं अटल जी, समझाया कि वे वास्तव में कवि हृदय हैं और व्याख्यायित किया कि अटल जी वक्त के साथ बड़े, और बड़े राजनेता होते गए, पर एक व्यक्ति और मित्र के रूप में वह कभी नहीं बदले।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि ने की और उन्होंने भी अटल जी के साथ बिताए वक्त को बहुत शिद्दत औऱ अत्यंत भावुकता से याद किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ नवीन कुमार जग्गी, अणुव्रत के प्रबंधक नहाटा जी और राधा कृष्ण मनोड़ी ने भी विचार व्यक्त किए। अटल जी के साथ सालों तक रहे उनके सहयोगियों का स्वागत भी इस अवसर पर किया गया, इनमें महान उत्तराखंडी साहित्यकार डोभाल जी भी शामिल थे।
जगदीश मंमगाईं को सम्मानित करते डॉ नरेंद्र कोहली
वास्तव में उत्तराखंड का समुचित प्रतिनिधित्व इस दौरान देखने में आया। दिल्ली में उत्तराखंडियों का नेतृत्व करने वाले एकीकृत एमसीडी की कंस्ट्रक्शन कमेटी के पूर्व चेयरमैन व भाजपा नेता जगदीश ममगाईं, डीपीएमआई के ओनर व भाजपा नेता डॉ विनोद बछेती, नंदन सिंह रावत, अनिल कुमार पंत, पत्रकार वेद उनियाल और रविंद्र बिष्ट भी इस मौके पर वहां उपस्थित थे। कार्यक्रम के आयोजकों ने उन सभी को डॉ कोहली के हाथों शॉल और स्मृति-चिह्न प्रदान करवाकर कराया। मैं तो हैरान था कि मुझे भी इस अवसर पर इसी तरह से सम्मानित किया गया। डॉ कोहली का हाथ अपने कंधे पर महसूस करके मैंने वह अनंत व अलौकिक ऊर्जा भी अनुभव की, जिसने साहित्य के इस महान पुरोध को 100 से अधिक पुस्तकें लिखने का साहस और योग्यता प्रदान की।
डॉ विनोद बछेती को स्मृति-चिह्न प्रदान करते डॉ कोहली। 
अनिल कुमार पंत को स्मृति-चिह्न प्रदान करते पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि। 
नंदन सिंह रावत का भी एक अलग ही रूप इस मौके पर देखने को मिला। कम से कम मैं तो हैरान रह गया, जब सेमवाल जी ने मंच से घोषणा की कि हिम उत्तरायणी पत्रिकता से सह संपादक नंदन सिंह रावत हैं। मैं निजी रूप से रावत जी और सेमवाल जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा कि कार्यक्रम में निमंत्रित किया औऱ ऐसे महान तपस्वियों के सान्निध्य का सुख और पुण्य कमाने का अवसर प्रदान किया।

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