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Tuesday, March 17, 2015

मां चंद्रवदनी मंदिर को बद्री-केदार की तरह धाम के रूप में मान्यता दिलाने की मुहिम

Uttarakhand News - गैर-सरकारी संगठन भयात के तत्वावधान में मार्च 15 को सुबह 11 बजे दिल्ली के पंचकुइयां मार्ग स्थित गढ़वाल भवन में एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें - देव संस्कृति बचाओ - अभियान के तहत दिल्ली की उत्तराखंड मूल की जनता का आह्वान किया गया कि वह चैत्र नवरात्र (मार्च 20 से 28, 2015) के दौरान टिहरी गढ़वाल में लगने वाले नौ दिवसीय नवरात्र आयोजन में भारी संख्या में भागीदारी करे।
बैठक की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ विनोद बछेती ने की और उन्होंने अपने संबोधन में उत्तराखंड के लिए पर्यटन उद्योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अनिल कुमार पंत ने सुझाव दिया कि देव संस्कृति बचाओ अभियान के तहत उत्तराखंड के पौराणिक महत्व वाले सभी उपेक्षित धर्म स्थलों के बारे में जानकारी का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि उन सभी का विकास सुनिश्चित किया जा सके।


क्या किसी क्षेत्र-विशेष के लोग अपने प्रयासों से अपने इलाके में स्थित किसी मंदिर को इतना प्रसिद्ध करवा सकते हैं कि पूरी दुनिया में उसे बद्रीनाथ, केदारनाथ या यमनोत्री-गंगोत्री जैसी मान्यता मिल जाए? इस विषय पर बैठक में मौजूद लोगों में एकमत नहीं था। पर दिलचस्प बात यह रही कि सभी लोग मां चंद्रवदनी धाम के प्रचार-प्रसार को लेकर पूरी तरह गंभीर थे और तन-मन-धन से काम करने को पूरी तरह तत्पर थे।

रोशनी चमोली ने बैठक में जानकारी दी कि मां चंद्रवदनी की पहली यात्रा दिल्ली से मार्च 26 को टिहरी गढ़वाल के लिए रवाना होगी। बैठक में अनेक लोगों ने मां चंद्रवदनी के मंदिर स्थल को धाम के रूप में मान्यता दिलाने के मंत्री प्रसाद नैथानी के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इस अवसर पर रोशनी चमोली, सूरज रावत, भरत रावत, अनिल कुमार पंत, देव सिंह रावत, सतेंद्र रावत, बी.एस. रावत, दर्शन सिंह रावत, किरन केंथोला, मनोज जुगरान और जगजीत बिष्ट आदि ने भी विचार व्यक्त किए। 

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