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Tuesday, March 3, 2015

उत्तराखंड की जर्जर सड़कों और खस्ताहाल बसों से यात्रियों की जान खतरे में

Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (Uttarakhand Chief Minister) हरीश रावत ने कहा है कि राज्य के उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि श्रमिक और सेवायोजकों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध हों। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और श्रममंत्री ने प्रेस विज्ञप्तियां जारी करके राज्य में विभिन्न उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।। लेकिन यही लोग उत्तराखंड की जर्जर सड़कों में खस्ताहाल सरकारी वाहनों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सजग क्यों नहीं हैं, यह मेरे लिए हैरानी का विषय है। कितने ही उत्तराखंडी युवक, महिलाएं, बच्चे और वृद्ध हर साल इन खूनी सड़कों और वाहनों की भेंट चढ़ जाते हैं। पर शासन और प्रशासन हैं कि उनकी नींद टूटती ही नहीं।
उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हरीश रावत ने श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति ये विचार "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" के अवसर पर प्रकट किए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों का आह्वान किय है कि सभी उद्यमी और श्रमिक यह सुनिश्चित करें कि उनमें परस्पर सहभागिता और सहयोग का वातावरण पनपे और उनमें मधुर संबंध स्थापित हों। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी संबंधित पक्षों को उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा के बारे में अत्यधिक सजग रहना चाहिए।

इससे पहले उत्तराखंड के श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने यह घोषणा की थी कि भारत के अन्य प्रांतों की तरह ही उत्तराखंड में भी 4 मार्च के दिन को "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही 4 मार्च से ही "राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह" का आयोजन भी किया जाएगा।

ऐसे आयोजनों का स्वागत किया जाना चाहिए। उत्तराखंड के उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है और यदि उत्तराखंड सरकार इसके लिए सजग दिखाई देती है, तो यह एक उत्तम लक्षण ही है। परंतु हैरानी औऱ उससे भी ज्यादा यह दुख की बात यह है कि यही उत्तराखंड सरकार राज्य में हर साल सैकड़ों लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने के बावजूद कोई सशक्त सड़क परिवहन नीति लाने में सर्वथा विफल ही रही है। खासतौर से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों और सरकारी परिवहन निगम की बसों की हालत जर्जर है। हरीश रावत सरकार को इनकी सुध भी लेनी चाहिए।

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