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Saturday, April 18, 2015

तांत्या टोपे को कृतज्ञ देशवासियों की श्रृद्धांजलि

Uttarakhand News - इस बार एक सुखद आश्चर्य यह देखने में आ रहा है कि अधिकांश राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। याद पहले भी किया करते थे, पर यह स्मृति गांधी जी,  पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और सावरकर आदि तक सीमित रहती थी। इस बार तो आज़ादी की लड़ाई के हर सिपाही को श्रृद्धा-सुमन अर्पित करने की होड़-सी मची हुई है।
शायद कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि यदि भाजपा नेताओं ने पहले आंसू बहा दिए, तो राजनीतिक लाभ वे उठा ले जाएंगे जैसाकि उन्होंने सरदार पटेल औऱ मालवीय के मामले में किया, इसलिए कांग्रेसी नेता भी पीछे नहीं रहना चाहते।

अच्छी बात यह है कि अब तांत्या टोपे जैसे आज़ादी की लड़ाई के महान सिपाही को सारे देश में याद किया जा रहा है। उत्तराखंड में भी भारत की पहली आजादी की लड़ाई के महानायक तांत्या टोपे की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी जा रही है। तांत्या टोपे के बारे में सभी लोग जानते हैं, पर दो लाइनें मैं लिखना ज़रूर चाहूंगा। इस शहीद का पूरा नाम था - रामचंद्र पांडुरंग टोपे औऱ उनका जन्म 1814 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह 1857 में अंग्रेजों से बुरी तरह घिरी हुई वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की मदद के लिए अपनी सेना के साथ ग्वालियर गए थे, पर देश के गद्दारों की वजह से पराजित हुए। इन्हें अंग्रेजों ने 18 अप्रेल 1859 के दिन फांसी दे दी। आइये हम सब भी मिलकर इस शहीद को श्रृद्धा सुमन अर्पित करें।

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