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Saturday, May 30, 2015

आखिर कब तक हमारा शोषण करते रहेंगे नेता

Uttarakhand News - दोस्तो हमारे उत्तराखन्ड के विकास के लिए कोई रोडमैप ही नही बना हैं.....! यह समस्या पूरे उत्तराखण्ड में व्यापक रुप से मौजूद है, जब तक उत्तराखण्ड के लिये राज्य सरकार द्वारा कोई रोडमैप तैयार नही होता विकास गति को आगे बढाना बेहद मुश्किल कार्य है समझने का प्रयास कीजिए.....! कब बनेगा और कौन बनायेगा.....! जनता का शोषण कब तक करेंगे हमारे स्थानीय नेता ....!

इन विचारों को हमारे सम्मुख रखने वाले लेखक हैं, अल्मोड़ा के किशन सिंह भंडारी। 

Kishan Singh Bhandari
Village & Post Manhet Molekhal Salt Block Distt Almora Uttrakhand. Pin 263667 Cont. No..+919958953879

उत्तराखंड में आपदा का मतलब नौकरशाही/नेताओं/ठेकेदारों/दलालों की पौ-बारह

Uttarakhand News - (भरत रावत) - जून 2013 में जब उत्तराखंड भीषण आपदा से जूझ रहा था, केदारघाटी में लाशों के ढे़र लगे थे, जान बचाने का संघर्ष चल रहा था और लोग भूख-प्यास से बिलबिला रहे थे। उस समय राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी महंगे होटलों में रात गुजार भोजन में लजीज व्यंजन (चिकन-मटन-अंडे, मटर-पनीर व गुलाब-जामुन) का स्वाद ले रहे थे।
फोटो व आलेख: साभार भरत रावत।
जून 2013 की उत्तराखंड त्रास्दी में पीड़ितों को राहत के पहुंचाने गए कार्मिकों ने किस तरह सरकारी खर्चे पर मौज उड़ाई और राहत कार्यों में अनियमितताएं बरतीं, यह जानकारी आरटीआइ कार्यकर्ता देहरादून निवासी भूपेंद्र कुमार के अथक प्रयास के बाद ही सामने आ पाई।

आपदा के समय जिस तरह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तड़प रहे थे, उसे देखते हुए उनके मन में आपदा राहत कार्यों की सच्चाई जानने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ व बागेश्वर के जिलाधिकारियों से आरटीआई में सूचना मांगी। आशंका के अनुरूप उन्हें सूचनाएं लेने में डेढ़ साल का लंबा समय लग गया।

सूचना के लिए उन्हें सूचना आयोग का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा।

देहरादून के नेहरू कालोनी निवासी भूपेंद्र कुमार जनहित के मुद्दों पर पहले भी मुखरता के साथ आरटीआई के तहत लड़ाई लड़ चुके हैं। सौ से अधिक सूचना के अधिकार के आवेदन लगा चुके भूपेंद्र कुमार तमाम मसलों पर फाइलों में दफन सच्चाई को न सिर्फ बाहर निकालने में सफल रहे, बल्कि सिस्टम को अपेक्षित कार्रवाई के लिए मजबूर भी करते रहे।

उन्होंने बताया कि कुछ हालिया सूचनाओं पर उनके प्रयास से कैदियों को पेशी पर लाने वाले पुलिसकर्मियों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्ता की जा चुकी है। लावारिस शवों के दाह संस्कार के लिए तीन हजार रुपये की व्यवस्था जैसा भी निर्णय भी सरकार से किया जा रहा है। यही नहीं पेशी पर आने वाले कैदियों के लिए फल आदि की व्यवस्था भी उनके प्रयास से परवान चढ़ी।

Sunday, May 24, 2015

हरीश रावत सरकार को फिर से सीखना होगा जनहित का पाठ

Uttarakhand News - एक भाई घनेंद्र सिंह रावत ने आज मुझे किसी समाचारपत्र की कटिंग भेजी, पर कहा कुछ नहीं। उसमें लिखे समाचार को पढ़ने के बाद मुझे समझ में आ गया कि रावत जी को औऱ कुछ बताने की जरूरत भी नहीं थी।

दरअसल समाचार में बताया गया था कि गढ़वाल के यमकेश्वर प्रखंड के ग्रामीण गंगा भोगपुर में क्रमिक अनशन में बैठे हैं। ग्रामीणों की तीन-सूत्री मांगें हैं - बीन नदी पर पुल, कौड़िया-किमसार मौटरमार्ग और बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध का निर्माण। उक्त समाचार के अनुसार राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क प्रभावित संघर्ष समिति का क्रमिक अनशन 13 वें दिन भी जारी रहा। शनिवार, 23 मई, को शाम के वक्त अनशनकारी सरिता देवी की तबियत इतनी खराब हो गई कि उन्हें ऋषिकेश स्थित राजकीय चिकित्सालय पहुंचाना पड़ा। अनशनकारियों ने घटना की जानकारी सिविल पुलिस व राजस्व पुलिस को भी दी, पर खबर के अनुसार देर शाम तक कोई वहां नहीं पहुंचा।

आश्चर्य और उससे भी ज्यादा यह दुख की बात है कि ऐसी मांगों के लिए उत्तराखंंड की जनता को अनशन करना पड़ता है। ये हालात केवल यमकेश्वर ब्लॉक के नहीं हैं। अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र की जनता ने भी कुछ महीनों पूर्व दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया था और कैंडल-मार्च निकाला था। टिहरी गढ़वाल की जनता डोबरा-चांटी पुल के निर्माण की मांग को लेकर रैलियों पर रैलियां कर रही है।

हरीश रावत के राज में उत्तराखंड की जनता आज त्राहि-त्राहि कर रही है। राज्य सरकार उत्तराखंड को विकास के पथ पर पीछे धकेलने में जुटी प्रतीत हो रही है। उत्तराखंड के लोग पानी, बिजली, शिक्षक और रोजगार के अभाव से त्रस्त हैं। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में खनन के ठेके बांटने में जुटी हरीश रावत सरकार क्या जनता के हित को प्राथमिकता देना सीखेगी? 

Saturday, May 23, 2015

Tallest Dam in India: Uttarakhand's Tehri Dam

Uttarakhand News - Uttarakhand's Tehri Dam is the tallest dam in India. This photo was clicked on a cold morning and the water is not visible because of a thin layer of fog enveloping it.

Tuesday, May 19, 2015

Uttarakhand; Eternal Ganga at Hardwar

Uttarakhand News -- The Eternal Ganga at Hardwar

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