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Tuesday, June 23, 2015

कोडिया-बनास-किमसार मोटर मार्ग के मामले पर जनता को बरगलाना अब संभव नहीं

Uttarakhand News - (सच्चिदानंद शर्मा) जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर में कोडिया -किमसार मोटर मार्ग, जो कि राजा जी राष्ट्रीय पार्क की सीमा में होने के कारण विगत लंबे समय से डामरीकरण की स्वीकृति के लिए लंबित पड़ा है, की सच्चाई जानने के लिए जब मैं 16 जून 2015 को गंगा भोगपुर उक्त मांग की स्वीकृति हेतू धरना स्थल पर बैठे क्षेत्रीय ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के मध्य पहुंचा, तो वहाँ मामले को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति थी । मामले की तह तक पहुंचने के बाद जो सच्चाई सामने आई वह चौकाने वाली है, जिसे सार्वजनिक करना मैं अपना दायित्व समझता हूँ, साथ ही सरकार के जो विभाग इस मार्ग में डामरीकरण में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं, वो भी किसी गलतफहमी का शिकार न हों, उन्हें भी वस्तुस्थिति से रू-ब-रू होना ज़रूरी है, अन्यथा पीड़ित जनता यदि न्यायालय की शरण में चली गई, तो उन्हें लेने के देने पड़ संकते हैं।
(Sachidanand Sharma: Ex-state minister in the former BJP Government)
 एक तथ्य जो सामने आया है वह यह है कि कोडिया-बनास-किमसार मार्ग जो कि कोडिया से पहाड़ के रास्ते बनास होते हुए किमसार जाने का मार्ग है, जो सन 1978 में ही लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित होने के पश्चात लोक निर्माण विभाग द्वारा इसका पक्का निर्माण किया गया है । चूंकि इस मार्ग का हस्तांतरण वन (संरक्षण ) अधिनियम 1980 से पूर्व किया गया था, अतः इसके लिए भारत सरकार की पूर्वानुमति की कोई आवश्यकता नहीं थीं। यधपि हस्तांतरित क्षेत्र विधिक रूप से आरक्षित वन व राजाजी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत स्थित है, तथापि उक्त मार्ग का रखरखाव व प्रबंधन लोक निर्माण विभाग के पास ही रहेगा, इसका पुनः डामरीकरण व मरम्मत आदि कार्य संपन्न करने में कोई विधिक अड़चन नहीं है।

दूसरा तथ्य जो सामने आया वह यह कि कच्चे मार्ग को पक्का कर डामरीकरण पर रोक केवल कोडिया -विन्ध्वासिनी -किमसार वन मोटर मार्ग पर लागू है, जो नदी के किनारे विन्ध्वासिनी होते हुए किमसार तक जाने वाला मोटर मार्ग है। माननीय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा गठित सी ० ई ० सी द्वारा कोडिया -विन्ध्वासिनी -किमसार वन मोटर मार्ग के सुदृढ़ीकरण पर रोक लगाई गई थी, ना कि कोडिया -बनास -किमसार मोटर मार्ग पर।
(Sachidanand Sharma speaking before local public)
वर्तमान में प्रदेश सरकार दो पृथक मार्गो के एक जैसे नाम होने के कारण जन आंदोलन को भ्रमित कर रही है। जिस कोडिया-बनास -किमसार मोटर मार्ग के डामरीकरण के लिए जनता आन्दोलनरत है उसके निर्माण में किसी भी प्रकार की वैधानिक अड़चन नहीं है। माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भारत सरकार द्वारा उपरोक्त विषयक बयान से अब प्रदेश सरकार की नींद खुल गयी होगी कि रिजर्व फॉरेस्ट व पार्क क्षेत्रों में स्थित वन अधिनियम 1980 से पूर्व के मार्गों पर भारत सरकार का उनके सुदृढ़ीकरण , डामरीकरण , रख रखाव अथवा विकास कार्यों हेतू किसी प्रकार का प्रतिबन्ध ना तो पूर्व में था ना ही वर्तमान में हैं बशर्ते सडकों का विस्तार व चौड़ीकरण आदि कार्यों से पूर्व समस्त औपचारिकता पूर्ण किया जाना आवश्यक होगा।
(Sachidanand Sharma speaking to the press)
अब यदि प्रदेश सरकार केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय का बहाना लेकर कोडिया- बनास -किमसार मोटर मार्ग का डामरीकरण, बिंज नदी पर सेतु व बाढ़ नियंत्रण हेतु तल्ला गंगा भोगपुर में तट बन्धो के निर्माण कार्यो में विलम्ब करती है, तो इसके लिए क्षेत्रीय जनता प्रदेश सरकार को कभी माफ़ नहीं कर सकती। प्रदेश सरकार को सम्बंधित विकास कार्यो में अविलम्ब अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, इन मुद्दों पर जनता को और अधिक समय तक बरगलाया नही जा सकता।

(सच्चिदानंद शर्मा उत्तराखंड की पूर्व भाजपा सरकार में राज्यमंत्री थे।)

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