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कोडिया-बनास-किमसार मोटर मार्ग के मामले पर जनता को बरगलाना अब संभव नहीं

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Uttarakhand News - (सच्चिदानंद शर्मा) जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर में कोडिया -किमसार मोटर मार्ग, जो कि राजा जी राष्ट्रीय पार्क की सीमा में होने के कारण विगत लंबे समय से डामरीकरण की स्वीकृति के लिए लंबित पड़ा है, की सच्चाई जानने के लिए जब मैं 16 जून 2015 को गंगा भोगपुर उक्त मांग की स्वीकृति हेतू धरना स्थल पर बैठे क्षेत्रीय ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के मध्य पहुंचा, तो वहाँ मामले को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति थी । मामले की तह तक पहुंचने के बाद जो सच्चाई सामने आई वह चौकाने वाली है, जिसे सार्वजनिक करना मैं अपना दायित्व समझता हूँ, साथ ही सरकार के जो विभाग इस मार्ग में डामरीकरण में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं, वो भी किसी गलतफहमी का शिकार न हों, उन्हें भी वस्तुस्थिति से रू-ब-रू होना ज़रूरी है, अन्यथा पीड़ित जनता यदि न्यायालय की शरण में चली गई, तो उन्हें लेने के देने पड़ संकते हैं। (Sachidanand Sharma: Ex-state minister in the former BJP Government)  एक तथ्य जो सामने आया है वह यह है कि कोडिया-बनास-किमसार मार्ग जो कि कोडिया से पहाड़ के रास्ते बनास होते हुए किमसार जाने का

उत्तराखंड में आपदा का मतलब नौकरशाही/नेताओं/ठेकेदारों/दलालों की पौ-बारह

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Uttarakhand News - (भरत रावत) - जून 2013 में जब उत्तराखंड भीषण आपदा से जूझ रहा था, केदारघाटी में लाशों के ढे़र लगे थे, जान बचाने का संघर्ष चल रहा था और लोग भूख-प्यास से बिलबिला रहे थे। उस समय राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी महंगे होटलों में रात गुजार भोजन में लजीज व्यंजन (चिकन-मटन-अंडे, मटर-पनीर व गुलाब-जामुन) का स्वाद ले रहे थे। फोटो व आलेख: साभार भरत रावत। जून 2013 की उत्तराखंड त्रास्दी में पीड़ितों को राहत के पहुंचाने गए कार्मिकों ने किस तरह सरकारी खर्चे पर मौज उड़ाई और राहत कार्यों में अनियमितताएं बरतीं, यह जानकारी आरटीआइ कार्यकर्ता देहरादून निवासी भूपेंद्र कुमार के अथक प्रयास के बाद ही सामने आ पाई। आपदा के समय जिस तरह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तड़प रहे थे, उसे देखते हुए उनके मन में आपदा राहत कार्यों की सच्चाई जानने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ व बागेश्वर के जिलाधिकारियों से आरटीआई में सूचना मांगी। आशंका के अनुरूप उन्हें सूचनाएं लेने में डेढ़ साल का लंबा समय लग गया। सूचना के लिए उन्हें सूचना आयोग का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा।

हरीश रावत सरकार को फिर से सीखना होगा जनहित का पाठ

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Uttarakhand News - एक भाई घनेंद्र सिंह रावत ने आज मुझे किसी समाचारपत्र की कटिंग भेजी, पर कहा कुछ नहीं। उसमें लिखे समाचार को पढ़ने के बाद मुझे समझ में आ गया कि रावत जी को औऱ कुछ बताने की जरूरत भी नहीं थी। दरअसल समाचार में बताया गया था कि गढ़वाल के यमकेश्वर प्रखंड के ग्रामीण गंगा भोगपुर में क्रमिक अनशन में बैठे हैं। ग्रामीणों की तीन-सूत्री मांगें हैं - बीन नदी पर पुल, कौड़िया-किमसार मौटरमार्ग और बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध का निर्माण। उक्त समाचार के अनुसार राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क प्रभावित संघर्ष समिति का क्रमिक अनशन 13 वें दिन भी जारी रहा। शनिवार, 23 मई, को शाम के वक्त अनशनकारी सरिता देवी की तबियत इतनी खराब हो गई कि उन्हें ऋषिकेश स्थित राजकीय चिकित्सालय पहुंचाना पड़ा। अनशनकारियों ने घटना की जानकारी सिविल पुलिस व राजस्व पुलिस को भी दी, पर खबर के अनुसार देर शाम तक कोई वहां नहीं पहुंचा। आश्चर्य और उससे भी ज्यादा यह दुख की बात है कि ऐसी मांगों के लिए उत्तराखंंड की जनता को अनशन करना पड़ता है। ये हालात केवल यमकेश्वर ब्लॉक के नहीं हैं। अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र की जनता ने भी कुछ

उत्तराखंड के 'मां, माटी और मिशन' की 'अपणू दगै भेंट'

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Uttarakhand News -  उत्तराखंड का "मां, माटी और मिशन" एक अत्यंत महत्वाकांक्षी आंदोलन प्रतीत होता है, जिसके द्वारा भुवन जोशी "भास्कर" और पूरन घुघत्याल "प्रेम" राज्य का चेहरा बदल देना चाहते हैं। हममें से बहुत से लोगों ने "मां, माटी और मिशन" के बारे में पहले भी पढ़ा और सुना होगा। कुछ ने इसे उन हजारों संगठनों में से एक समझा होगा, जो हर रोज जन्म लेते हैं और कुछ समय बाद असमय ही दम तोड़ देते हैं, पर ज्यादातर लोगों का मानना है कि "मां, माटी और मिशन" कुछ हटकर है और इससे जुड़े लोगों में कुछ कर गुज़रने का जुनून है। यह जुनून भुवन जोशी और पूरन घुघत्याल को सही दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान करता है। इन लोगों से बात करते वक्त ही लगता है कि ये लोग अभूतपूर्व ऊर्जा से भरे हुए हैं और यही ऊर्जा है, जिसकी वजह से कुछ महीने पूर्व संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुझे लगभग राज़ी कर लिया था कि मैं दिल्ली से रामनगर जाकर उनकी बैठक में शामिल होऊं। मेरा मानना है कि उत्तराखंड की भलाई के लिए "मां, माटी और मिशन"  के बैनर तले कुछ-न-कुछ सकारात्मक काम ज़रूर क

उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को चाहिए समाज में सम्मानजनक स्थान

Uttarakhand News - उत्तराखंड की युवा पीढ़ी अब भारतीय समाज में एक गौरवपूर्ण स्थान चाहती है। कुछ कर गुज़रने की ऊर्जा से भरे इन युवाओं में 25 साल से लेकर 50 साल तक के लोग भी शामिल हैं। आप कहेंगे कि 50 साल का व्यक्ति युवा कैसे? दरअसल, बात जब जातियों और पीढ़ियों की हो रही हो, तो हम इस आयु सीमा के लोगों को एक ग्रुप में रख सकते हैं। इस आयु समूह के अधिकांश लोग आरंभिक संघर्ष के बाद किसी-न-किसी रोजगार में लग चुके होते हैं और पेट भरने से आगे की बातें उनके दिमाग में आने लगती हैं। पहले क्या छवि थी उत्तराखंडी समाज के लोगों की भारत की आज़ादी के बाद दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में भारी संख्या में सरकारी और निजी क्षेत्र के कार्यालय खुले, तो पंजाबी, मराठी, बंगाली और दक्षिणी भारत के लोगों ने महत्वपूर्ण पदों पर अधिकार जमा लिया, क्योंकि वे पढ़े-लिखे थे औऱ अपनी जाति के लोगों को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति उनमें कूट-कूटकर भरी थी। उत्तराखंडी समाज गढ़वाली-कुमाऊंनी, राजपूत-ब्राह्मण, ऊंची जाति के ब्राह्मण और ऊंची जाति के राजपूत जैसे निरर्थक खांचों में बंटा हुआ था। इस बंटे हुए समाज को काम मिला चपरासी, कुक, घ

क्या स्वयंभू ईमानदार पार्टी की बैठक बन गई गुंडों का जमावड़ा

Uttarakhand News - कहते हैं सत्ता निरंकुश होती है। सत्ता इन्सान का दिमाग खराब कर देती है। सत्ता के लिए दोस्त ही दोस्त का दुश्मन हो जाता है। सत्ताधारी नेता सारी ताकत अपने हाथ में रखना चाहता है और साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह विरोधियों का संपूर्ण सफाया करने को तत्पर रहता है। दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आज जो कुछ होने का आरोप योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण लगा रहे हैं, उससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईमानदार पार्टी होने का दावा करने वाला दल वास्तव में भाड़े के गुंडों का जमावड़ा गया है। बताया जाता है कि बैठक में लगभग 300 लोग थे और सिर्फ आठ लोगों ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा को पाट्री की राष्ट्रीय कार्यसमिति से निकालने का विरोध किया। योगेंद्र यादव ने तो यह भी दावा किया कि 167 सदस्यों से पहले ही हस्ताक्षर करा लिए गए थे। बैठक पूरी तरह से स्क्रिप्टिड थी। योगेंद्र यादव ने आगे कहा - बैठक में बाउंसर बुलाए गए थे और हमारे साथी को धसीटा गया। प्रशांत भूषण ने कहा - न्यूट्रल अॉबसर्वर को बै

उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के नए कर्णधार क्या भला करेंगे कांग्रेस का

Uttarakhand News - कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, जनार्दन द्विवेदी, ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके सूचना दी है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति के लिए मनोनीत सदस्यों के नामों को अपनी स्वीकृति दे दी है। जिस तरह से कांग्रेस ने भारी संख्या में उपाध्यक्ष और महासचिव व सचिव पद बांटे हैं, उससे लगता है कि सूची बनाते समय सभी प्रभावशाली गुटों को खुश करने की भरपूर कोशिश की गई है। वैसे भी पहले केंद्र और उसके बाद एक-एक करके कई राज्यों में बुरी तरह से शिकस्त खाने के बाद कांग्रेस के पास कोई और चारा ही नहीं बचा है। अब तो जो साथ हैं, उन्हें खुश रखा जाए इसी में भलाई है, वरना डूबती हुई नाव में सवारी कौन करना चाहेगा। देश की राजनीति के महासमुद्र में फिलहाल कांग्रेस की नाव डूबती नज़र आ रही है, पर फिर भी उत्तराखंड कांग्रेस के पद बांटने में भाई-भतीजावाद को पूरा प्रश्रय दिया गया है। आप सूची में दर्ज नाम पढ़ेंगे, तो खुद ही समझ जाएंगे कि उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के सबसे बड़े नाम से लेकर उनके सिपहसालारों के रिश्तेदारों तक सभी को उत्तरा

हिम उत्तरायणी पत्रिका के लोकार्पण समारोह के बहाने एक साहित्यिक योगी से मुलाकात

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Uttarakhand News - पांचजन्य के सहयोगी संपादक सूर्य प्रकाश सेमवाल और उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और कांग्रेस नेता नंदन सिंह रावत ने जब मुझे हिम उत्तरायणी के लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया, तो मुझे बहुत खुशी हुई कि उत्तराखंडी समाज अपनी संस्कृति और साहित्य को लेकर कितना जागरुक है। हिम उत्तरायणी का अर्थ मैंने अपनी जानकारी के हिसाब से कर लिया, क्योंकि नंदन सिंह रावत उत्तरायणी पर्व के दिन को राजकीय अवकाश घोषित करवाने के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। कार्यक्रम मेरी उम्मीद से ज़्यादा लाभकर सिद्ध हुआ। महान साहित्यिक योगी डॉ नरेंद्र कोहली का सम्मान करते नंदन सिंह रावत रविवार, मार्च 22, 2015 को अटल सहयात्रियों का अभिनंदन एवं हिम उत्तरायणी पत्रिका का लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में भाग लेने मैं नंदन सिंह रावत और उत्तराखंड के युवा कलाकार मयंक आर्या के साथ 3 बजे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित अणुव्रत भवन में पहुंचा और हमें वहां अनेक महान साहित्यकारों, शिक्षाविदों और राजनीतिज्ञों के सान्निध्य का अवसर प्राप्त हुआ। जब हमने यथोचित रूप से सुसज्जित और पवित्रता से नहाए चमचमाते हॉल मे

गढ़वाल भवन मामले में एसएचओ के लाइनहाज़िर होने की बात सच या झूठ?

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Uttarakhand News - गत रविवार मैं दिल्ली में पंचकुंइयां रोड पर स्थित गढ़वाल भवन गया, तो सबसे पहले गेट पर लगे इस नोटिस पर मेरी नज़र पड़ी। सेल पर लगी सील से गढ़वाल भवन से जुड़े लोग ही नहीं समस्त उत्तराखंडी समाज के लोगों को इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है। गढ़वाल भवन और उसके गेट पर लगा नोटिस। आज सारा दिन उत्तराखंडी समाज में इस बात की चर्चा हो रही थी कि गढ़वाल भवन मामले में मंदिर मार्ग थाने के एसएचओ को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। बहुत से लोगों ने तो फेसबुक पर गढ़वाल भवन के पदाधिकारियों को बधाई भी दे दी। यह सच है या कोरी अफवाह, यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी हुई है। पर कुछ भी हो मामला काफी दिलचस्प नज़र आ रहा है। गढ़वाल भवन वैसे भी अकसर चर्चा का विषय बना रहता है। इन निरर्थक चर्चाओं का केंद्र रहती है गढ़वाल भवन का संचालन करने वाली कमेटी के चुनाव में शिरकत करने वाले गुटों के बीच की राजनीति। ऐसा माना जाता है कि यहां चुनाव लड़ने वाले बहुत से लोग उत्तराखंड या दिल्ली की राजनीति में अपना भविष्य देख रहे होते हैं। अब सच कुछ भी हो, पर इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि गढ़वाल भव

उत्तराखंड की जर्जर सड़कों और खस्ताहाल बसों से यात्रियों की जान खतरे में

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Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (Uttarakhand Chief Minister) हरीश रावत ने कहा है कि राज्य के उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि श्रमिक और सेवायोजकों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध हों। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और श्रममंत्री ने प्रेस विज्ञप्तियां जारी करके राज्य में विभिन्न उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।। लेकिन यही लोग उत्तराखंड की जर्जर सड़कों में खस्ताहाल सरकारी वाहनों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सजग क्यों नहीं हैं, यह मेरे लिए हैरानी का विषय है। कितने ही उत्तराखंडी युवक, महिलाएं, बच्चे और वृद्ध हर साल इन खूनी सड़कों और वाहनों की भेंट चढ़ जाते हैं। पर शासन और प्रशासन हैं कि उनकी नींद टूटती ही नहीं। उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हरीश रावत ने श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति ये विचार "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" के अवसर पर प्रकट किए। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों का आह्वान किय है कि सभी उद्यमी और श्रमिक यह सुनिश्चित करें कि

गढ़वाल भवन का प्रथम तल सील

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Uttarakhand News - सबसे पहले अनिल कुमार पंत जी ने मुझे सूचित किया था कि दिल्ली में पंचकुइंया मार्ग पर स्थित गढ़वाल भवन की पहली मंजिल को NDMC ने सील कर दिया है। आमतौर पर चुपचाप अपना काम करने वाले धीर-गंभीर पंत जी उस दिन काफी उत्साहित थे। यह स्वाभाविक ही है, क्योंकि वे उन कुछ गिने-चुने लोगों में से एक हैं, जो निस्वार्थ भाव से गढ़वाल हितैषिणी सभा के काम में जुटे रहते हैं और लाइम-लाइट से दूर रहते हैं। उन्होंने हिमालयन न्यूज एक का लिंक भी भेजा था और कहा था कि मैं इस न्यूज को ज़रूर लगाऊं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह समाचार पहुंच सके। व्यस्तता के चलते मैं उस दिन इसे नहीं लगा सका, इसलिए, देर से ही सही, पर आज लगा रहा हूं। हिमालयन न्यूज में प्रकाशित समाचार - “दिल्ली के गढ़वाल भवन की पहली मंजिल को NDMC ने सील कर दिया है। 2008 से इस मंजिल पर किरायदार के जरिये किराया नहीं दिए जाने की वजह से NDMC ने इसे सील किया है। इस फैसले का गढ़वाल भवन से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। किरायदार पर इस मंजिल पर अवैध तरीके से कब्जा करने का आरोप है। कब्जे को लेकर उत्तराखंड समाज और किरायदार के बीच काफी लम्बे

उत्तराखंड न्यूज डॉट ओआरजी परिवार में देखते-ही-देखते हो गए 1000 सदस्य

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Uttarakhand News - कल सुबह शोभा नेगी जी ने जैसे ही uttarakhandnews.org का फेसबुक पेज लाइक किया, तो दो महीने से भी कम पुराने इस पेज (facebook.com/uttarakhandnews.org) पर 1000 लाइक्स अंकित हो गए। हम उत्तराखंड के सभी शुभचिंतकों का धन्यवाद करना चाहते हैं, जिन्होंने हमारी इस छोटी-सी शुरुआत का फेसबुक पर लाइक का बटन दबाकर समर्थन किया है।  शोभा नेगी व उनके परिवार का चित्र। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जब हमने इस पेज को लाइव किया था, तो हमने सोचा था कि इस पेज को जो पहले सौ लोग लाइक करेंगे, उनके फोटो प्रकाशित करके हम उनका धन्यवाद करेंगे, पर लाइक्स इतनी तेजी से बढ़े कि पता ही नहीं चला कि कब 1000 की संख्या भी पार हो गई। पर  किसी अन्य अवसर पर उन सभी 100 लोगों के फोटो भी हम जरूर प्रकाशित करेंगे, उनका धन्यवाद करने के लिए। आप सभी उत्तराखंडी भाई-बहनों को हम यह विश्वास भी दिलाना चाहते हैं कि आपने जो भरोसा हम पर दिखाया है उसे हम कभी टूटने नहीं देंगे।uttarakhandnews.org में सिर्फ औ सिर्फ उत्तराखंड और उत्तराखंडियों के हित की बात ही की जाएगी। uttarakhandnews.org आपकी अपनी संपत्ति है, जैसा आप सभी च

उत्तराखंड सरकार का हाथ औद्योगिक घरानों के साथ

Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को 'वाइब्रेंट उत्तराखंड ट्रेड-फेयर 2015' नामक कार्यक्रम का देहरादून स्थित परेड ग्राउंड पर गुरुवार के दिन विधिवत रूप से शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड इवेंट अॉर्गेनाइजेशन (आईआईटीइओ) व इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अॉफ उत्तराखंड (आईएयू) के तत्वावधान में किया गया।  मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से उत्तराखंड में निवेश का अनुकूल माहौल बनता है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार देशी व विदेशी निवेश को राज्य में लाने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके अनुकूल नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने एम.एस.एम.ई नीति का जिक्र भी किया। इस अवसर पर हरीश रावत ने देशी-विदेशी औद्योगिक घरानों का आह्वान किया कि वे उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना करें, इसमें राज्य सरकार उनका भरपूर सहयोग करेगी। आईआईटीइओ के चेयरमैन बी.एस. नेगी ने भी इस मौके पर विचार व्यक्त किए। विधायक राजकुमार, आईएयू अध्यक्ष पंकज

आप की जीत से उत्तराखंडियों को मिली - निराशा, हताशा और अनिश्चितता

Uttarakhand News - उत्तराखंड मूल के 36 लाख लोगों को आम आदमी पार्टी की 'भयावह' चुनावी जीत से कोई फायदा नहीं हुआ है। अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के करीब 18-19 लाख उत्तराखंडी मतदाताओं में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला, जो उनकी तथाकथित ईमानदार पार्टी के बैनर तले चुनावी संग्राम में हिस्सा ले पाता। स्पष्ट है उन्होंने उत्तराखंडियों की सिरे से उपेक्षा कर दी। क्या उत्तराखंड के लोग आम आदमी नहीं हैंं? जब अन्ना का आंदोलन अपने उफान पर था, तो हजारों उत्तराखंडी लोग उनके साथ दृढ़ता से खड़े थे। बाद में अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी का गठन किया, तो उत्तराखंडियों ने उनके फैसले का समर्थन किया और पार्टी के प्रचार-प्रसार मेें पूरा सहयोग किया। आम आदमी पार्टी की नीतियों का भरपूर प्रचार-प्रसार किया और उसकी ईमानदार होने की छवि को मजबूत किया। उत्तराखंडियों को उम्मीद थी कि कम से कम अरविंद केजरीवाल वे गलतियां तो नहीं दोहराएंगे, जो गलतियां सत्ता के नशे में चूर कांग्रेस और भाजपा ने उत्तराखंडियों को जनसंख्या के अनुसार टिकट न देकर की थी। दुख की बात है कि यह उम्मीद एक मृग-मरीचिका ही निकली। अरविंद केजरीवा

Uttarakhand News - Five (5) Important News from Uttarakhand

Uttarakhand News - The people of Uttarakhand continued to feel chillness in the weather because of snowfall in the higher reaches and rain in the plains. In my opinion, following are the five (5) most important news of this week: 1. Kedarnath, Badrinath, Gangotri and Yamnotri regions got covered under thick layers of snow. India's winter game destination Auli and high altitude areas of Pithauragarh also received fresh snowfall. 2. In spite of the heavy snowfall and rain, no highways of Uttarakhand got obstructed. It's actually very unusual, otherwise moderate rain is enough to block roads in the state, especially, in the capital Dehradun. The number of tourists visiting Uttarakhand reduced as compared to the last year data. 3. The Uttarakhand Spring Bird Festival begins at Chunakhan February 4. The five-day bird festival is organized with the objective to make Uttarakhand hottest bird watching destination. 4. The Uttarakhand government has asked central government fo

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से कहा - घर लौट आओ प्लीज

Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 1 फरवरी के दिन मुंबई में निर्माणाधीन बद्रीनाथ मंदिर का शिलान्यास किया। करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मंदिर का निर्माण उत्तराखंड मित्र मंडल नाम की संस्था कर रही है। पिछले कुछ सालों में उत्तराखंडी प्रवासियों ने जिस तरह से शानदार तरक्की की है, उसकी रावत ने तारीफ की और उनसे अनुरोध किया कि अब वे राज्य के विकास में योगदान दें। यह वास्तव में गर्व की बात है कि उत्तराखंड के लोग जहां-जहां भी जाते हैं, वहां अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कार साथ ले जाते हैं। लेकिन उत्तराखंड से हो रहे भारी पलायन व उसके नुकसान से भली-भांति परिचित रावत ने इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडियों का आह्वान किया कि वे उत्तराखंड वापस लौट आएं। उन्होंने विशेष रूप से प्रवासी उत्तराखंडी निवेशकों से आग्रह किया कि वे अपनी जन्मभूमि के विकास में सहयोग करें और उत्तराखंड में उद्योग-धंघे लगाएं,  जिससे राज्य में रोजगार के अवसर पैदा हों और वर्तमान पीढ़ी के हो रहे भारी पलायन में कुछ कमी लाई जा सके। मेरा गांव मेरा धन योजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने प्रवासी व

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने की पत्रकारों की सराहना

Uttarakhand News - उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 30 जनवरी को इंडियन फेडरेशन अॉफ वर्किंग जर्नलिस्ट के देहरादून नगर निगम में आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में पत्रकारों के संगठन को पत्रकारिता के लिए मार्गदर्शक और समाज को दिशा देने वाला बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पत्रकारों और समाज सेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर आपदा और पुनर्निर्माण के समय मीडिया की भूमिका विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन भी किया गया। मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सन 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस के जवानों और स्थानीय लोगों ने आपदा पीड़ितों की जिस तरह से सहायता की थी, वह मानव सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। माइनस 7 डिग्री तापमान में भी उत्तराखंड के लोग जिस तरह से पुनर्निर्माण के काम में लगे रहे, वह उनकी समाज के प्रति प्रतिबद्धता और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण है। रावत ने कहा कि उन्हें मीडिया से यही अपेक्षा है कि वह आपदा से ग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के सकारात्मक पक्ष को देश व दुनिया के सामने प्रस्तुत करे। आपदा से ग्रस्त केदारनाथ के

उत्तराखंड न्यूज - उत्तराखंड के पांच (5) महत्वपूर्ण समाचार

Uttarakhand News - उत्तराखंड के लोगों के लिए बीता सप्ताह काफी हलचल भरा रहा। राज्य. के ऊंची पहाड़ियों पर हुई भारी बर्फबारी से राज्य में कड़क़ड़ाती ठंड और भी बढ़ गई, लेकिन राजनीतिक मौसम गर्माया रहा। दिल्ली में उत्तराखंड मूल के लोगों ने विधनसभा सीटों पर लड़ने का फैसला करके उत्तराखंडियों को आपसी मेल-जोल बढ़ाने का अच्छा मौका दिया हुआ है। मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन करके उत्तराखंडियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य की सीमाओं से बहुत आगे का सफर तय कर लिया है। मेरी नजर में इस सप्ताह की पांच महत्वपूर्ण खबरें निम्न हैं - 1. उत्तराखंड के प्रसिद्ध भू-गर्भ वैज्ञानिक के.एस. बल्दिया (पिथौरागढ़ निवासी) को पद्म भूषण और मुंबइया फिल्मों में गीत लिखने वाले सुप्रसिद्ध एड-गुरु प्रसून जोशी को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया। 2. राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एडीसी) का 15 सदस्यीय दल ले. जनरल वी. पी. सिंह के नेतृत्व में अगले महीने प्रथम सप्ताह में 1-6 फरवरी उत्तराखंड का दौोरा करेगा। 3.  उत्तराखंडियों ने मुंबई में कौथिग का भव्य आयोजन किया। शायद दुबई कौथिग के बाद कौथिग का यह सबस

उत्तराखंडियों की जीत होगी मोहन सिंह बिष्ट की जीत

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Uttarakhand News - मोहन सिंह बिष्ट (Mohan Singh Bisht) का नाम बहुत सुना था, आज करावल नगर में उनका जलवा देख भी लिया। दिल्ली की राजनीति में वह सही मायनों में उत्तराखंड के शेर हैं।  Mohan Singh Bisht with BJP leader Brajesh Saurabh आज जब उनसे मुलाकात हुई, तो वह चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। जनसभाओं को संबोधित करने की व्यवस्तता के बीच वह इलाके में हो रहे एक विवाह समारोह में भी पहुंच गए। रास्ते पर चलते-चलते आस-पास के लोगों को उनके नाम से इस तरह से बुला रहे थे, मानों करावल नगर एक विधानसभा चुनाव क्षेत्र न हो, बल्कि एक बड़ा-सा गांव हो, जहां रहने वाले सभी लोग एक-दूसरे को भली-भांति जानते-पहचानते हों। लोग-बाग उन्हें देखकर मार्ग पर ही अपनी समस्याओं की उनसे चर्चा करने लगते थे, जिससे स्पष्ट होता था कि वह बिष्ट जी के साथ कितने सहज हैं। Mohan Singh Bisht with social worker Nandan Singh Rawat जब उनसे पूछा कि इस बार उन्हें कितनी टक्कर मिल रही है विरोधी दलों से, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "विरोधी दल और उम्मीदवार जनता को कितना भी दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर लें, पर मेरी दो दशकों की सेवा

उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर प्रश्नचिह्न?

Uttarakhand News - मेरे लिखे एक लेख उत्तराखंडियों के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव निरर्थक पर फेसबुक पर कल एक चर्चा-सी छिड़ गई थी। इसका टॉपिक था - विनोद बछेती जी बिन्नी के नामांकन में गए या नहीं। क्या उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली से जुड़े लोग किसी उत्तराखंडी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार या किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल हो सकते हैं? इस पर मंच के पदाधिकारियों में गंभीर मतभेद नजर आए। अनेक भाइयों ने तो उत्तराखंड एकता मंच के भविष्य पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया। अब इस विषय का विश्लेषण हम तीन बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं - 1. कोई व्यक्ति कहां जाए और कहां न जाए, यह उसका व्यक्तिगत फैसला होता है। 2. यदि वह एक समूह का सदस्य है और उस समूह विशेष के नियम-कायदे उस पर लागू होते हैं, तो यह उसका निजी नहीं, बल्कि सामूहिक फैसला हो जाता है। 3. अब यदि वही व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता है, तो उसे अपने दल के प्रति भी निष्ठावान रहना पड़ता है। 4. अंतिम स्थिति यह है कि अब वह व्यक्ति एक राजनीतिक दल से भी जुड़ा है और अपने सांस्कृतिक और जाति समूह का भी अभिन्न अंग है। यहां चौथी स्थिति सब