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उत्तराखंड के 'मां, माटी और मिशन' की 'अपणू दगै भेंट'

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Uttarakhand News -  उत्तराखंड का "मां, माटी और मिशन" एक अत्यंत महत्वाकांक्षी आंदोलन प्रतीत होता है, जिसके द्वारा भुवन जोशी "भास्कर" और पूरन घुघत्याल "प्रेम" राज्य का चेहरा बदल देना चाहते हैं। हममें से बहुत से लोगों ने "मां, माटी और मिशन" के बारे में पहले भी पढ़ा और सुना होगा। कुछ ने इसे उन हजारों संगठनों में से एक समझा होगा, जो हर रोज जन्म लेते हैं और कुछ समय बाद असमय ही दम तोड़ देते हैं, पर ज्यादातर लोगों का मानना है कि "मां, माटी और मिशन" कुछ हटकर है और इससे जुड़े लोगों में कुछ कर गुज़रने का जुनून है। यह जुनून भुवन जोशी और पूरन घुघत्याल को सही दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान करता है। इन लोगों से बात करते वक्त ही लगता है कि ये लोग अभूतपूर्व ऊर्जा से भरे हुए हैं और यही ऊर्जा है, जिसकी वजह से कुछ महीने पूर्व संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुझे लगभग राज़ी कर लिया था कि मैं दिल्ली से रामनगर जाकर उनकी बैठक में शामिल होऊं। मेरा मानना है कि उत्तराखंड की भलाई के लिए "मां, माटी और मिशन"  के बैनर तले कुछ-न-कुछ सकारात्मक काम ज़रूर क

तांत्या टोपे को कृतज्ञ देशवासियों की श्रृद्धांजलि

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Uttarakhand News -  इस बार एक सुखद आश्चर्य यह देखने में आ रहा है कि अधिकांश राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। याद पहले भी किया करते थे, पर यह स्मृति गांधी जी,  पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और सावरकर आदि तक सीमित रहती थी। इस बार तो आज़ादी की लड़ाई के हर सिपाही को श्रृद्धा-सुमन अर्पित करने की होड़-सी मची हुई है। शायद कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि यदि भाजपा नेताओं ने पहले आंसू बहा दिए, तो राजनीतिक लाभ वे उठा ले जाएंगे जैसाकि उन्होंने सरदार पटेल औऱ मालवीय के मामले में किया, इसलिए कांग्रेसी नेता भी पीछे नहीं रहना चाहते। अच्छी बात यह है कि अब तांत्या टोपे जैसे आज़ादी की लड़ाई के महान सिपाही को सारे देश में याद किया जा रहा है। उत्तराखंड में भी भारत की पहली आजादी की लड़ाई के महानायक तांत्या टोपे की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी जा रही है। तांत्या टोपे के बारे में सभी लोग जानते हैं, पर दो लाइनें मैं लिखना ज़रूर चाहूंगा। इस शहीद का पूरा नाम था - रामचंद्र पांडुर

उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को चाहिए समाज में सम्मानजनक स्थान

Uttarakhand News - उत्तराखंड की युवा पीढ़ी अब भारतीय समाज में एक गौरवपूर्ण स्थान चाहती है। कुछ कर गुज़रने की ऊर्जा से भरे इन युवाओं में 25 साल से लेकर 50 साल तक के लोग भी शामिल हैं। आप कहेंगे कि 50 साल का व्यक्ति युवा कैसे? दरअसल, बात जब जातियों और पीढ़ियों की हो रही हो, तो हम इस आयु सीमा के लोगों को एक ग्रुप में रख सकते हैं। इस आयु समूह के अधिकांश लोग आरंभिक संघर्ष के बाद किसी-न-किसी रोजगार में लग चुके होते हैं और पेट भरने से आगे की बातें उनके दिमाग में आने लगती हैं। पहले क्या छवि थी उत्तराखंडी समाज के लोगों की भारत की आज़ादी के बाद दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में भारी संख्या में सरकारी और निजी क्षेत्र के कार्यालय खुले, तो पंजाबी, मराठी, बंगाली और दक्षिणी भारत के लोगों ने महत्वपूर्ण पदों पर अधिकार जमा लिया, क्योंकि वे पढ़े-लिखे थे औऱ अपनी जाति के लोगों को आगे बढ़ाने की इच्छाशक्ति उनमें कूट-कूटकर भरी थी। उत्तराखंडी समाज गढ़वाली-कुमाऊंनी, राजपूत-ब्राह्मण, ऊंची जाति के ब्राह्मण और ऊंची जाति के राजपूत जैसे निरर्थक खांचों में बंटा हुआ था। इस बंटे हुए समाज को काम मिला चपरासी, कुक, घ

क्या स्वयंभू ईमानदार पार्टी की बैठक बन गई गुंडों का जमावड़ा

Uttarakhand News - कहते हैं सत्ता निरंकुश होती है। सत्ता इन्सान का दिमाग खराब कर देती है। सत्ता के लिए दोस्त ही दोस्त का दुश्मन हो जाता है। सत्ताधारी नेता सारी ताकत अपने हाथ में रखना चाहता है और साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह विरोधियों का संपूर्ण सफाया करने को तत्पर रहता है। दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आज जो कुछ होने का आरोप योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण लगा रहे हैं, उससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि ईमानदार पार्टी होने का दावा करने वाला दल वास्तव में भाड़े के गुंडों का जमावड़ा गया है। बताया जाता है कि बैठक में लगभग 300 लोग थे और सिर्फ आठ लोगों ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा को पाट्री की राष्ट्रीय कार्यसमिति से निकालने का विरोध किया। योगेंद्र यादव ने तो यह भी दावा किया कि 167 सदस्यों से पहले ही हस्ताक्षर करा लिए गए थे। बैठक पूरी तरह से स्क्रिप्टिड थी। योगेंद्र यादव ने आगे कहा - बैठक में बाउंसर बुलाए गए थे और हमारे साथी को धसीटा गया। प्रशांत भूषण ने कहा - न्यूट्रल अॉबसर्वर को बै

उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के नए कर्णधार क्या भला करेंगे कांग्रेस का

Uttarakhand News - कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, जनार्दन द्विवेदी, ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके सूचना दी है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति के लिए मनोनीत सदस्यों के नामों को अपनी स्वीकृति दे दी है। जिस तरह से कांग्रेस ने भारी संख्या में उपाध्यक्ष और महासचिव व सचिव पद बांटे हैं, उससे लगता है कि सूची बनाते समय सभी प्रभावशाली गुटों को खुश करने की भरपूर कोशिश की गई है। वैसे भी पहले केंद्र और उसके बाद एक-एक करके कई राज्यों में बुरी तरह से शिकस्त खाने के बाद कांग्रेस के पास कोई और चारा ही नहीं बचा है। अब तो जो साथ हैं, उन्हें खुश रखा जाए इसी में भलाई है, वरना डूबती हुई नाव में सवारी कौन करना चाहेगा। देश की राजनीति के महासमुद्र में फिलहाल कांग्रेस की नाव डूबती नज़र आ रही है, पर फिर भी उत्तराखंड कांग्रेस के पद बांटने में भाई-भतीजावाद को पूरा प्रश्रय दिया गया है। आप सूची में दर्ज नाम पढ़ेंगे, तो खुद ही समझ जाएंगे कि उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के सबसे बड़े नाम से लेकर उनके सिपहसालारों के रिश्तेदारों तक सभी को उत्तरा

हिम उत्तरायणी पत्रिका के लोकार्पण समारोह के बहाने एक साहित्यिक योगी से मुलाकात

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Uttarakhand News - पांचजन्य के सहयोगी संपादक सूर्य प्रकाश सेमवाल और उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट और कांग्रेस नेता नंदन सिंह रावत ने जब मुझे हिम उत्तरायणी के लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया, तो मुझे बहुत खुशी हुई कि उत्तराखंडी समाज अपनी संस्कृति और साहित्य को लेकर कितना जागरुक है। हिम उत्तरायणी का अर्थ मैंने अपनी जानकारी के हिसाब से कर लिया, क्योंकि नंदन सिंह रावत उत्तरायणी पर्व के दिन को राजकीय अवकाश घोषित करवाने के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। कार्यक्रम मेरी उम्मीद से ज़्यादा लाभकर सिद्ध हुआ। महान साहित्यिक योगी डॉ नरेंद्र कोहली का सम्मान करते नंदन सिंह रावत रविवार, मार्च 22, 2015 को अटल सहयात्रियों का अभिनंदन एवं हिम उत्तरायणी पत्रिका का लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में भाग लेने मैं नंदन सिंह रावत और उत्तराखंड के युवा कलाकार मयंक आर्या के साथ 3 बजे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित अणुव्रत भवन में पहुंचा और हमें वहां अनेक महान साहित्यकारों, शिक्षाविदों और राजनीतिज्ञों के सान्निध्य का अवसर प्राप्त हुआ। जब हमने यथोचित रूप से सुसज्जित और पवित्रता से नहाए चमचमाते हॉल मे

गढ़वाल भवन मामले में एसएचओ के लाइनहाज़िर होने की बात सच या झूठ?

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Uttarakhand News - गत रविवार मैं दिल्ली में पंचकुंइयां रोड पर स्थित गढ़वाल भवन गया, तो सबसे पहले गेट पर लगे इस नोटिस पर मेरी नज़र पड़ी। सेल पर लगी सील से गढ़वाल भवन से जुड़े लोग ही नहीं समस्त उत्तराखंडी समाज के लोगों को इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है। गढ़वाल भवन और उसके गेट पर लगा नोटिस। आज सारा दिन उत्तराखंडी समाज में इस बात की चर्चा हो रही थी कि गढ़वाल भवन मामले में मंदिर मार्ग थाने के एसएचओ को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। बहुत से लोगों ने तो फेसबुक पर गढ़वाल भवन के पदाधिकारियों को बधाई भी दे दी। यह सच है या कोरी अफवाह, यह बात तो भविष्य के गर्भ में छिपी हुई है। पर कुछ भी हो मामला काफी दिलचस्प नज़र आ रहा है। गढ़वाल भवन वैसे भी अकसर चर्चा का विषय बना रहता है। इन निरर्थक चर्चाओं का केंद्र रहती है गढ़वाल भवन का संचालन करने वाली कमेटी के चुनाव में शिरकत करने वाले गुटों के बीच की राजनीति। ऐसा माना जाता है कि यहां चुनाव लड़ने वाले बहुत से लोग उत्तराखंड या दिल्ली की राजनीति में अपना भविष्य देख रहे होते हैं। अब सच कुछ भी हो, पर इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि गढ़वाल भव