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आखिर कब तक हमारा शोषण करते रहेंगे नेता

Uttarakhand News - दोस्तो हमारे उत्तराखन्ड के विकास के लिए कोई रोडमैप ही नही बना हैं... ..! यह समस्या पूरे उत्तराखण्ड में व्यापक रुप से मौजूद है, जब तक उत्तराखण्ड के लिये राज्य सरकार द्वारा कोई रोडमैप तैयार नही होता विकास गति को आगे बढाना बेहद मुश्किल कार्य है समझने का प्रयास कीजिए.....! कब बनेगा और कौन बनायेगा.....! जनता का शोषण कब तक करेंगे हमारे स्थानीय नेता ....! इन विचारों को हमारे सम्मुख रखने वाले लेखक हैं, अल्मोड़ा के किशन सिंह भंडारी।  Kishan Singh Bhandari Village & Post Manhet Molekhal Salt Block Distt Almora Uttrakhand. Pin 263667 Cont. No..+919958953879

उत्तराखंड में आपदा का मतलब नौकरशाही/नेताओं/ठेकेदारों/दलालों की पौ-बारह

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Uttarakhand News - (भरत रावत) - जून 2013 में जब उत्तराखंड भीषण आपदा से जूझ रहा था, केदारघाटी में लाशों के ढे़र लगे थे, जान बचाने का संघर्ष चल रहा था और लोग भूख-प्यास से बिलबिला रहे थे। उस समय राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी महंगे होटलों में रात गुजार भोजन में लजीज व्यंजन (चिकन-मटन-अंडे, मटर-पनीर व गुलाब-जामुन) का स्वाद ले रहे थे। फोटो व आलेख: साभार भरत रावत। जून 2013 की उत्तराखंड त्रास्दी में पीड़ितों को राहत के पहुंचाने गए कार्मिकों ने किस तरह सरकारी खर्चे पर मौज उड़ाई और राहत कार्यों में अनियमितताएं बरतीं, यह जानकारी आरटीआइ कार्यकर्ता देहरादून निवासी भूपेंद्र कुमार के अथक प्रयास के बाद ही सामने आ पाई। आपदा के समय जिस तरह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तड़प रहे थे, उसे देखते हुए उनके मन में आपदा राहत कार्यों की सच्चाई जानने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ व बागेश्वर के जिलाधिकारियों से आरटीआई में सूचना मांगी। आशंका के अनुरूप उन्हें सूचनाएं लेने में डेढ़ साल का लंबा समय लग गया। सूचना के लिए उन्हें सूचना आयोग का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा।

हरीश रावत सरकार को फिर से सीखना होगा जनहित का पाठ

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Uttarakhand News - एक भाई घनेंद्र सिंह रावत ने आज मुझे किसी समाचारपत्र की कटिंग भेजी, पर कहा कुछ नहीं। उसमें लिखे समाचार को पढ़ने के बाद मुझे समझ में आ गया कि रावत जी को औऱ कुछ बताने की जरूरत भी नहीं थी। दरअसल समाचार में बताया गया था कि गढ़वाल के यमकेश्वर प्रखंड के ग्रामीण गंगा भोगपुर में क्रमिक अनशन में बैठे हैं। ग्रामीणों की तीन-सूत्री मांगें हैं - बीन नदी पर पुल, कौड़िया-किमसार मौटरमार्ग और बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंध का निर्माण। उक्त समाचार के अनुसार राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क प्रभावित संघर्ष समिति का क्रमिक अनशन 13 वें दिन भी जारी रहा। शनिवार, 23 मई, को शाम के वक्त अनशनकारी सरिता देवी की तबियत इतनी खराब हो गई कि उन्हें ऋषिकेश स्थित राजकीय चिकित्सालय पहुंचाना पड़ा। अनशनकारियों ने घटना की जानकारी सिविल पुलिस व राजस्व पुलिस को भी दी, पर खबर के अनुसार देर शाम तक कोई वहां नहीं पहुंचा। आश्चर्य और उससे भी ज्यादा यह दुख की बात है कि ऐसी मांगों के लिए उत्तराखंंड की जनता को अनशन करना पड़ता है। ये हालात केवल यमकेश्वर ब्लॉक के नहीं हैं। अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र की जनता ने भी कुछ

Tallest Dam in India: Uttarakhand's Tehri Dam

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Uttarakhand News - Uttarakhand's Tehri Dam is the tallest dam in India. This photo was clicked on a cold morning and the water is not visible because of a thin layer of fog enveloping it.

Uttarakhand; Eternal Ganga at Hardwar

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Uttarakhand News -- The Eternal Ganga at Hardwar Sent from my BlackBerry® smartphone from !DEA

उत्तराखंड के 'मां, माटी और मिशन' की 'अपणू दगै भेंट'

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Uttarakhand News -  उत्तराखंड का "मां, माटी और मिशन" एक अत्यंत महत्वाकांक्षी आंदोलन प्रतीत होता है, जिसके द्वारा भुवन जोशी "भास्कर" और पूरन घुघत्याल "प्रेम" राज्य का चेहरा बदल देना चाहते हैं। हममें से बहुत से लोगों ने "मां, माटी और मिशन" के बारे में पहले भी पढ़ा और सुना होगा। कुछ ने इसे उन हजारों संगठनों में से एक समझा होगा, जो हर रोज जन्म लेते हैं और कुछ समय बाद असमय ही दम तोड़ देते हैं, पर ज्यादातर लोगों का मानना है कि "मां, माटी और मिशन" कुछ हटकर है और इससे जुड़े लोगों में कुछ कर गुज़रने का जुनून है। यह जुनून भुवन जोशी और पूरन घुघत्याल को सही दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान करता है। इन लोगों से बात करते वक्त ही लगता है कि ये लोग अभूतपूर्व ऊर्जा से भरे हुए हैं और यही ऊर्जा है, जिसकी वजह से कुछ महीने पूर्व संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुझे लगभग राज़ी कर लिया था कि मैं दिल्ली से रामनगर जाकर उनकी बैठक में शामिल होऊं। मेरा मानना है कि उत्तराखंड की भलाई के लिए "मां, माटी और मिशन"  के बैनर तले कुछ-न-कुछ सकारात्मक काम ज़रूर क

तांत्या टोपे को कृतज्ञ देशवासियों की श्रृद्धांजलि

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Uttarakhand News -  इस बार एक सुखद आश्चर्य यह देखने में आ रहा है कि अधिकांश राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं। याद पहले भी किया करते थे, पर यह स्मृति गांधी जी,  पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और सावरकर आदि तक सीमित रहती थी। इस बार तो आज़ादी की लड़ाई के हर सिपाही को श्रृद्धा-सुमन अर्पित करने की होड़-सी मची हुई है। शायद कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि यदि भाजपा नेताओं ने पहले आंसू बहा दिए, तो राजनीतिक लाभ वे उठा ले जाएंगे जैसाकि उन्होंने सरदार पटेल औऱ मालवीय के मामले में किया, इसलिए कांग्रेसी नेता भी पीछे नहीं रहना चाहते। अच्छी बात यह है कि अब तांत्या टोपे जैसे आज़ादी की लड़ाई के महान सिपाही को सारे देश में याद किया जा रहा है। उत्तराखंड में भी भारत की पहली आजादी की लड़ाई के महानायक तांत्या टोपे की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी जा रही है। तांत्या टोपे के बारे में सभी लोग जानते हैं, पर दो लाइनें मैं लिखना ज़रूर चाहूंगा। इस शहीद का पूरा नाम था - रामचंद्र पांडुर