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कांग्रेस और भाजपा,दोनों ने उत्तराखंडियों को बनाया अप्रैल फूल

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कांग्रेस और भाजपा,दोनों ने  हमेशा उत्तराखंडियों को बनाया अप्रैल फूल बनाया है। हम इन राष्ट्रीय दलों को अपनी ज़मीन में इस उम्मीद में जिताते चले आये हैं क़ि वो हमें बराबरी का इंसान समझेंगे और हमारा विकास करेंगे, मगर नेता लोग हमें बेवकूफ समझते हैं। हमारे वोटों से चुनाव जीतकर हर बार हमें अप्रैल फूल बना देते हैं। हैरानी तो इस बात की होती है कि फण्ड न होने का रोना रोकर जो नेता विकास कार्यों की उपेक्षा करते हैं, उनके पास दलबदल कराने के लिए करोड़ों रूपए कहाँ से आ जाते हैं। उत्तराखंड के लोग देश के अन्य राज्यों में भी रहते हैं और वहां भी उनकी घोर उपेक्षा  की जाती है। दिल्ली में तो करीब 35 लाख उत्तराखंडियों के रहने का दावा किया जाता रहा है और एक भी विधायक उत्तराखंड मूल का नहीं है। क्या ये राजनीतिक दल डेमोक्रेसी का भी मजाक नहीं उड़ा रहे हैं? केजरीवाल जी दिल्ली में आपकी पार्टी के कितने विधायक हैं? अब उत्तराखंड में जो राजनीतिक सर्कस चल रहा है, क्या आप सोचते हैं कि उससे हम उत्तराखंडियों को फायदा होगा? अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मेरे भोले भले भाई बहनों जाग जाओ। ये आपको एक बार फिर से अप्रैल फूल बनाने की तै

हरीश रावत की ये 5 गलतियां भी बनीं उत्तराखंड के राजनीतिक संकट की वजह

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उत्तराखंड आज गंभीर राजनीतिक संकट में फंसा है, तो  हरीश रावत से ज़्यादा इसके लिए कोई और दोषी नहीं है। आप कहेंगे कि हरीश रावत तो  खुद षड्यंत्रकारियों की चालबाज़ी का शिकार हुए हैं। आपकी बात ग़लत नहीं है, लेकिन याद रखिए कि  सतपाल महाराज और बहुगुणा ने कांग्रेस खुशी-खुशी या आऱसएस की विचारधारा में अचानक उमड़ आई श्रृद्धा की वजह से नहीं छोड़ी थी। क्या हरीश रावत नहीं जानते थे कि ये दिग्गज नेता उनके खिलाफ ऐसे ही किसी सत्ता-पलटू साजिश में व्यस्त होंगे?   अगर हम कहें कि हरीश रावत आज उत्तराखंड के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ हैं, तो उनके करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक जीवन को देखते हुए  यह ग़लत नहीं होगा। कई बड़े पदों पर वह रहे और कई चुनाव उन्होंने जीते, सबसे बड़ी बात कि उत्तराखंड के निर्माण के बाद जब भी कांग्रेस ने राज्य में सत्ता का स्वाद चखा, उसमें हरीश रावत का योगदान सबसे ज़्यादा था। फिर भी आज अगर उत्तराखंड राजनीतिक संकट में फंसा है, तो इसके लिए हरीश रावत के ये 5 फैसले जिम्मेदार हैं:   कई खेमों में बंटी उत्तराखंड कांग्रेस  को एकजुट करने की कोशिश नहीं करना  - स तपाल महाराज के भाजपा में जाने के

शहीद सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरू को शत-शत नमन

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अंग्रेजों के दमनकारी शासन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के चमकते सितारों सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरू को 23 मार्च के ही दिन लाहौर जेल में फांसी दे दी थी। ये तीनों शहीद भारतीयों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। इन तीनों शहीदों को शत-शत नमन।

उत्तराखंड के नववर्ष की बहुत-बहुत बधाई

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अज चैत्र महीने की एक गति है। अज के दिन को उत्तराखंड में नए साल के रूप में मनाया जाता है। आइये हम सब एक  दूसरे को उत्तराखंडी नव वर्ष की शुभकामना दें।

कोडिया-बनास-किमसार मोटर मार्ग के मामले पर जनता को बरगलाना अब संभव नहीं

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Uttarakhand News - (सच्चिदानंद शर्मा) जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र यमकेश्वर में कोडिया -किमसार मोटर मार्ग, जो कि राजा जी राष्ट्रीय पार्क की सीमा में होने के कारण विगत लंबे समय से डामरीकरण की स्वीकृति के लिए लंबित पड़ा है, की सच्चाई जानने के लिए जब मैं 16 जून 2015 को गंगा भोगपुर उक्त मांग की स्वीकृति हेतू धरना स्थल पर बैठे क्षेत्रीय ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के मध्य पहुंचा, तो वहाँ मामले को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति थी । मामले की तह तक पहुंचने के बाद जो सच्चाई सामने आई वह चौकाने वाली है, जिसे सार्वजनिक करना मैं अपना दायित्व समझता हूँ, साथ ही सरकार के जो विभाग इस मार्ग में डामरीकरण में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं, वो भी किसी गलतफहमी का शिकार न हों, उन्हें भी वस्तुस्थिति से रू-ब-रू होना ज़रूरी है, अन्यथा पीड़ित जनता यदि न्यायालय की शरण में चली गई, तो उन्हें लेने के देने पड़ संकते हैं। (Sachidanand Sharma: Ex-state minister in the former BJP Government)  एक तथ्य जो सामने आया है वह यह है कि कोडिया-बनास-किमसार मार्ग जो कि कोडिया से पहाड़ के रास्ते बनास होते हुए किमसार जाने का

Dobra Chanti Bridge: can you call it a Bridge

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Uttarakhand News - Dobra Chanti Bridge has become a never ending story for people of Uttarakhand. The construction is going on for the last eight years and as per several media sources more than 130 crore Rupees have been spent, but local people have got nothing. Just check the picture, do you call it a bridge? Dobra Chanti Bridge: Bridge or two towers?

कब तक करेंगे प्रकृति से पाखंड

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Uttarakhand News - (सच्चिदानंद शर्मा) Sachidanand Sharma, Raj Nagar, Ghaziabad विश्व पर्यावरण दिवस पर कुछ लिखने से पहले हिमालयन गौरव कवि गिर्दा की इस रचना का जिक्र  न करना न्यायसंगत नहीं होगा ।  एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम। एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम। अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी, तुम तो पानी के व्योपारी, खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी, बिछी हुई ये बिसात तुम्हारी, सारा पानी चूस रहे हो, नदी-समन्दर लूट रहे हो, गंगा-यमुना की छाती पर कंकड़-पत्थर कूट रहे हो, उफ!! तुम्हारी ये खुदगर्जी, चलेगी कब तक ये मनमर्जी, जिस दिन डोलगी ये धरती, सर से निकलेगी सब मस्ती, महल-चौबारे बह जायेंगे खाली रौखड़ रह जायेंगे बूँद-बूँद को तरसोगे जब - बोल व्योपारी – तब क्या होगा ? नगद – उधारी – तब क्या होगा ?? आज भले ही मौज उड़ा लो, नदियों को प्यासा तड़पा लो, गंगा को कीचड़ कर डालो, लेकिन डोलेगी जब धरती – बोल व्योपारी – तब क्या होगा ? वर्ल्ड बैंक के टोकनधारी – तब क्या होगा ? योजनकार